कोविड और गर्मी से जूझते किसानों की तस्वीरों से मुख्य मंत्री को केंद्र सरकार का दिल पिघलने की उम्मीद

कृषि को तबाही के रास्ते पर डालने के लिए बनाऐ गए काले बिलों पर मोहर न लगाने की राष्ट्रपति को गुहार

बादलों की लोगों के सामने ड्रामेबाज़ी की कड़ी आलोचना, कहा ऐसी हरकतों से अकालियों को कोई भी फ़ायदा नहीं पहुंचेगा

चंडीगढ़, 25 सितम्बर: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने उम्मीद ज़ाहिर की है कि कृषि बिलों के खि़लाफ़ कोविड और अत्यंत गर्मी की परवाह न करते हुए रोष-प्रदर्शन करने वाले किसानों का दर्द केंद्र सरकार तक पहुँचेगा और वह कृषि क्षेत्र की जरा सी भी फिक्र न करते हुए उसे तबाही के जिस रास्ते पर डालने पर तुली है, उससे गुरेज़ करेगी।

मुख्यमंत्री ने किसानों और कृषि क्षेत्र जोकि पंजाब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है, के साथ जुड़े किसानों की हालत पर गहरी चिंता ज़ाहिर करते हुए आगे कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की तरफ से बुरी मानसिकता के साथ तैयार किये असंवैधानिक कृषि कानूनों ने किसानों को हाशिये की तरफ धकेल दिया है जिस कारण वह कोविड महामारी के दौरान सडक़ों पर आकर अपनी जि़न्दगियां खतरे में डालने पर मजबूर हो गए हैं।

मुख्यमंत्री ने उम्मीद ज़ाहिर की, ‘शायद पंजाब और कई अन्य राज्यों में सैंकड़े ही स्थानों पर हज़ारों की संख्या में रोष-प्रदर्शन कर रहे किसानों की बुरी हालत देख कर केंद्र सरकार का दिल पिघल जाये।’ उन्होंने आगे कहा कि शायद अब भारतीय जनता पार्टी को गलती का एहसास होगा।
अपने आखिरी साँसों तक इन काले कानूनों का डट कर विरोध करने की वचनबद्धता को दोहराते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने भारत के राष्ट्रपति से अपील की कि इन बिलों पर मंज़ूरी की मोहर न लगाई जाये। यह कानून बनाऐ ही इसलिए गए हैं जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया जा सके और देश की अनाज सुरक्षा को खतरे में डाला जाये जिससे लाखों ही किसानों और उनके परिवारों के अलावा अपने गुज़ारे के लिए कृषि खाद्य श्रंखला पर निर्भर करते लोगों को परेशानियों का सामना हो सके। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह बिल लागू हो गए तो इनसे सरहदी राज्य पंजाब के लिए बहुत बुरे परिणाम निकलेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार पर पूँजीवादी ताकतों के हितों की पूर्ति के लिए किसानों की चिंताओं को अनदेखा करने का दोष भी लगाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार और पंजाब कांग्रेस की तरफ से इन बिलों का विरोध करने के लिए किसानों के साथ कंधे से कंधा जोड़ कर खड़ा जायेगा और अदालतों में जाने समेत जो भी कदम ज़रूरी हों, वह उठाये जाएंगे जिससे राज्य के मज़बूत कृषि नैटवर्क को तोड़-फोड़ केंद्र सरकार के ख़तरनाक मंसूबों पर नकेल डाली जा सके।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अकालियों पर भी तीखे हमले करते हुए कहा कि उनकी तरफ से इन बिलों सम्बन्धी लोगों के सामने सिफऱ् नाटक ही किया जा रहा है जिसको किसान भी पूरी तरह समझते हुए मगरमच्छ के आंसू बहाने के आरोप लगा चुके हैं। सुखबीर बादल और हरसिमरत बादल की तरफ से उन (कैप्टन अमरिन्दर सिंह) पर हमले करने पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने इसको एक ऐसा पैंतरा बताया जिससे इन दोनों की तरफ से किसानों के हितों की रक्षा करने में नाकाम रहने और कृषि आर्डीनैंसों की पूरी हिमायत करके केंद्र सरकार में बेशर्मी के साथ हिस्सेदार बने रहने जैसे शर्मनाक कामों से लोगों का ध्यान हटाया जा सके।

उन्होंने कहा कि अकालियों की तरफ से अपनाए जाते दोहरे मापदण्डों का पूरी तरह पर्दाफाश हो गया है जोकि उनके केंद्र के किसान विरोधी सत्ताधारी गठजोड़ का हिस्सा बने रहने से साफ़ ज़ाहिर होता है। मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि अकाली अभी तक केंद्र सरकार की सार्वजनिक तौर पर आलोचना करने से इन्कारी हैं। हरसिमरत बादल की तरफ केंद्रीय मंत्रालय में से इस्तीफ़ा देने का यह नाटक शिरोमणि अकाली दल की संजीदगी का किसानों को एहसास करवाने के लिए अपर्याप्त है।

केंद्र पर काबिज़ सत्ताधारी गठजोड़ एन.डी.ए. में से बाहर आने से लगातार इंकार करने के लिए सुखबीर बादल पर सवाल खड़े करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अकालियों के हत्थकंडों से पंजाब के किसान पूरी तरह अवगत हो चुके हैं और अकालियों को अब इस ड्रामे से कोई भी लाभ लेने की इजाज़त नहीं देंगे।

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