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हल्दी घाटी की लड़ाई मध्यकालीन भारत के इतिहास की निर्णायक घटना

हल्दी घाटी की लड़ाई मध्यकालीन भारत के इतिहास की निर्णायक घटना
  • PublishedDecember 13, 2019

इस लड़ाई में अकबर को सिवाए एक हाथी के कुछ भी न मिला -राज्यपाल पंजाब

चंडीगढ़, 13 दिसंबर। पंजाब के राज्यपाल श्री वी पी सिंह बदनौर ने आज कहा कि हल्दी घाटी की ऐतिहासिक लड़ाई में से अकबर का नेतृत्व वाली मुग़ल फौजों ने सिवाए रामप्रसाद नाम के एक हाथी के और कुछ भी हासिल हुआ।आज यहाँ मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल में ‘हल्दी घाटी की लड़ाई का असली विजेता कौन’ विषय पर हुई विचार-चर्चा की शुरुआत करते हुये राज्यपाल पंजाब जिनके साथ लैफ़. जन. (सेवामुक्त) के.जे. सिंह, मेजर जनरल (सेवामुक्त) रणबीर सिंह, इतिहास के प्रो. अभिमंयू सिंह भी उपस्थित थे, ने कहा कि मेवाड़ उस समय के राजपूताना क्षेत्र का केवल 1/8(आठवां हिस्सा) हिस्सा था जबकि उस समय के मुग़ल महाराजा अकबर बादशाह के पास बेतहाशा संसाधन थे परन्तु उन्होंने कहा कि महाराना प्रताप की तरफ से दी गई करारी टक्कर से मुग़ल महाराजा कभी भी मेवाड़ पर जीत हासिल नहीं कर सका और हल्दी घाटी की लड़ाई भी उसके लिए एक बड़ा नुक्सान साबित हुयी। इस विचार-चर्चा का संचालन लेफ्टिनेंट जनरल (सेवामुक्त) भुपिन्दर सिंह ने किया।इस बात की पुष्टि के लिए ऐतिहासिक हवाले देते हुये उन्होंने कहा कि राजपूत राजा मान सिंह और बख्शी आसिफ अली जोकि इस लड़ाई का हिस्सा थे, को इस उपरांत कभी भी मुग़ल बादशाह के दरबार में घुसने नहीं दिया गया और न ही कोई मनसबदारी दी गई। इसी तरह उन्होंने कहा कि मुगलों की तरफ से इस जीत का कोई भी जश्न नहीं मनाया गया और जिस जगह पर महाराना प्रताप का घोड़ा मरा था, उस जगह पर महाराना प्रताप की तरफ से एक बड़ा मंदिर बनाना यह साबित करता है कि उस लड़ाई से उपरांत भी वह उस क्षेत्र का राजा था और इस ऐतिहासिक लड़ाई का विजेता था।

उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि मेवाड़ ने हमेशा आज़ादी का आनंद माना है और कभी भी किसी की अधीनता स्वीकार नहीं की है। उन्होंने कहा कि हम सभी के लिए बड़े मान वाली बात है कि महाराना प्रताप ने देश निवासियों में जबर और ज़ुल्म के खि़लाफ़ ताकतवर व्यक्ति के खि़लाफ़ खड़े होने की चिंगारी जलाई।इस मौके पर सभी पैनल सदस्यों ने एकमत होकर कहा कि हल्दी घाटी की लड़ाई दो महा योद्धों के में एक ऐतिहासिक लड़ाई थी, जिससेे देश के मध्यकालीन इतिहास में नया मोड़ आया। उन्होंने कहा कि महाराना प्रताप को पता था कि वह मेवाड़ की शान का प्रतीक है क्योंकि उसके दादा राणा सांगा ने अकबर के दादा बाबर को भी सख्त चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि इसी लिए महाराना प्रताप ने गुरिल्ला युद्ध को अपना कर देश में ताकतवर मुग़ल साम्राज्य के खि़लाफ़ चुनौती एक नये तरीके से पेश की।इस मौके पर उन्होंने कहा कि महाराना प्रताप की जीत और उनकी वीरता का एक प्रमाण यह भी है कि इस लड़ाई के उपरांत उन्होंने उस क्षेत्र के 32 अन्य किलों पर भी जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि मेवाड़ के लोगों ने कभी भी यह नहीं माना कि उनकी हल्दी घाटी की लड़ाई में हार हुयी है, जिस कारण मुग़ल साम्राज्य की अधीनता उनकी तरफ से कबूल नहीं की गयी।-

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The Punjab Wire