अमरीकी माहिर डा. चाक ने पाकिस्तान द्वारा सोशल मीडिया का प्रयोग करके भारतीय अर्थव्यवस्था पर हमले से सावधान किया

पाकिस्तान के सम्बन्ध में दोहरी भूमिका निभा रहा अमरीका

रैफरैंडम-2020 को कश्मीर समस्या के साथ पंजाब को जोडऩे के लिए आई.एस.आई. के मंसूबों की कड़ी का हिस्सा बताया

किसी भी सूरत में पंजाब आतंकवाद को सिर नहीं उठाने देगा-कैप्टन अमरिन्दर सिंह

एस.ए.एस. नगर (मोहाली), 11 दिसंबर:आतंकवाद और आंतरिक सुरक्षा पर प्रसिद्ध अमरीकी माहिर डा. पीटर चाक ने आज कहा कि पाकिस्तान द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था पर हमला करने के लिए सोशल मीडिया की ताकत का प्रयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने सावधान किया कि आई.एस.आई. सोशल मीडिया साईटों के गुप्त संकेतों, सुरक्षित दूर संचार प्लेटफार्मों और ऑनलाइन मैपिंग टैक्रॉलॉजी का प्रयोग छुपे हुए ढंग से कश्मीर में जहादियों की भर्ती मुहिम या सीधे तौर पर आतंकवादी हमलों के लिए मदद करने में कर सकती है क्योंकि पाकिस्तान द्वारा कश्मीर में भारत विरोधी दलों को शह देने का पुराना इतिहास है।रैंड कोर्पोरेशन से अमरीकी माहिर ने सुझाव दिया कि पाकिस्तान से निपटने का सबसे कारगार ढंग सहयोगी और हिस्सेदार मुल्कों के साथ मिलकर काम करना होगा जिससे पाकिस्तान पर दबाव बनाया जा सके। इसी तरह इन मुल्कों को यह बात भी समझानी होगी कि पाकिस्तान की धरती से चलती दहशत की कार्यवाहियों के कहर से वह भी बच नहीं सकते। उन्होंने सचेत किया कि अमरीका द्वारा पाकिस्तान के साथ दोहरे किरदार वाला खेल खेला जा रहा है क्योंकि उसकी अफगानिस्तान में रणनीतिक रूचि है और यही कारण है कि अमरीका पाकिस्तान के खि़लाफ़ सख्त स्टैंड नहीं ले रहा।हमले करने के लिए ड्रोन और अकेले तौर पर आतंकवादी कार्यवाही के बढ़ रहे प्रयोग के संदर्भ में अमरीकी माहिर ने इस खतरे से निपटने के लिए ऐसी टैक्रॉलॉजी और कानूनों की लाजि़मी रजिस्ट्रेशन करवाने का न्योता दिया। ऐसे जवाबी हमलों में भरोसे योग्यता को यकीनी बनाने के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि इस में ग़ैर-सरकारी संस्थायों, मानवीय अधिकार संस्थायों और सामाजिक भाईचारे का व्यापक तौर पर सम्मिलन किया जाये। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि 100 प्रतिशत कट्टरपंथी ऑनलाइन जगह नहीं ले सकती और मानवीय संपर्क इस प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे ग्रुपों को अलगाववादियों द्वारा आसान निशाना बनाऐ जाने को स्वीकार करते हुए डा. चाक ने कहा कि यह ग्रुप जल्दी ही आतंकवाद की धौंस के आगे हथियार फेंकने वाले नहीं हैं। रैफरैंडम -2020 के स्पष्ट हवाले में डा. चाक ने कहा कि उनका मानना है कि अमरीका, यू.के. और कैनेडा से सरगर्मियाँ चला रहे विदेशी ग्रुपों और पाकिस्तान में खालिस्तान समर्थकी दहशतगर्दों की तरफ से मौजूदा समय में सिख नौजवानों को कट्टरवाद के रास्ते पर चलाने के मनोरथ के साथ ज़ोरदार ढंग से सोशल मीडिया के द्वारा यत्न किये जा रहे हैं। दूसरे के.पी.एस. गिल यादगारी भाषण मौके पर ‘डिजीटलायजड़ नफऱत: ऑनलाइन कट्टरवाद, हिंसक इंतहापसन्दी और आतंकवाद’ के समकालीन विषय पर अपने विचार पेश करते हुए डा. चाक ने सावधान किया, ‘‘यह संकेत उभर रहे हैं कि आई.एस.आई. कश्मीर में गड़बड़ी के साथ पंजाब को अस्थिर करने की कोशिशों के लिए मंसूबे बना रही है।’’डा. चाक ने सुझाव दिया कि राज्य सरकार ऐसे समूह की शिनाख्त करे और पाकिस्तान की छिपी हुई जंग का मुकाबला करने के लिए लोगों को भी जोड़ा जाये। अपने मुख्य भाषण में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि आज के समय वैश्वीकरण के दौर में आतंकवाद आसानी से अंतरराष्ट्रीय भौगोलिक सरहदों को पार कर सकता है। इन्टरनेट और सोशल मीडिया के प्रयोग से नौजवानों को उकसाने, दहशत फैलाने और दहशतगर्दी विचारधारा का प्रसार करने में योगदान डाल रहा है। पड़ोसी दुश्मन और सरहद से लगता होने के नाते पंजाब संवेदनशील राज्य होने और जम्मू -कश्मीर के साथ जुड़े होने के कारण नशा आतंकवाद की बढ़ रही चुनौती की बात करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आधुनिक पुलिसिंग की ज़रूरत पर ज़ोर दिया जो टैक्रॉलॉजी पक्ष से पूरी तरह परिपक्व और पेशेवर पहुँच रखती हो। इस समागम की अध्यक्षता कर रहे मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम किसी भी सूरत में पंजाब को बीते हुए काले दौर की तरफ फिर ले जाने की इजाज़त नहीं दे सकते, हम सबको पता है कि अब फिर क्या घट रहा है।’’कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने के.पी.एस. गिल द्वारा पंजाब पुलिस को दिए नेतृत्व और राज्य के हालात सुखदायक और आम की तरह बनाने में उनके योगदान की प्रशंसा करते हुए पुलिस फोर्स को स्व. पूर्व डी.जी.पी की लीडरशिप से सीध लेने का न्योता दिया और कुशल नेतृत्व के लिए उनसे प्रेरणा लेने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि के.पी.एस. गिल के कार्यकाल को मुल्क भर में स्वीकृत किया जाता है। उन्होंने प्रोग्राम में उपस्थित अधिकारियों को कहा कि लीडरशिप आप से शुरू होती है। अपने भाषण में डा. चाक ने संचार माहिरों और सिविल सोसायटी ग्रुपों को एकजुट करके कट्टरपंथी की प्रक्रिया में सीधे तौर पर दख़ल देने का न्योता दिया जिससे परिवर्तनीेय तौर पर संदेश मुहिमें विकसित करके इनको फैलाया जा सके। भाषण के बाद एक सवाल के जवाब में अमरीकी माहिर ने कहा कि गुगल, वट्सऐप जैसे सोशल मीडिया ग्रुपों को अब यह एहसास हो रहा है कि तबाह करने वाली सरगर्मियों के लिए इन सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का प्रयोग से उनकी भरोसे योग्यता को चोट लग रही है। डा. चाक का कहना है कि इन्टरनेट, पाकिस्तान में आम आतंकवादियों के स्वभाव और चरित्र को बुनियादी रूप में बदलने में सहायक सिद्ध हुआ था जबकि तालिबान जो 2001 में ताकत गवाने के बाद में सिलसिलेवार ढंग से आगे बढ़ रहा है, ने इन्टरनेट के द्वारा सूचना तकनीक का प्रयोग बढ़ाया है और वह इस तकनीक को अपनी इलेक्ट्रॉनिक प्रापगंडा जंग शुरू करने के लिए बेहद अनुकूल मान रहा है। उन्होंने खुलासा किया कि तालिबान के पास इस समय पर कई इन्टरनेट डोमेन हैं।डा. चाक के मुताबिक पाकिस्तान और अफग़ानिस्तान में आतंकवादियों और दहशतगर्दों द्वारा इन्टरनेट और ऑनलाइन मंचों के प्रयोग के सुरक्षा हालात पर पडऩे वाले प्रभाव को देखते हुए यह घटनाक्र्रम भारत के लिए अत्यधिक चिंता का संयोग हैं। उन्होंने कहा, ‘कश्मीर में दंगों और प्रदर्शनों को प्रोत्साहन देने के लिए टविट्टर का पहले ही प्रयोग किया जा रहा है और अब जब कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा हटा दिया गया है तो लश्कर-ए-तोइबा जैसे संगठनों और ऑनलाइन मंचों के द्वारा बेचैनी का आलम तेज़ करने के लिए तत्पर होंगे।’’एक अन्य हैरानीजनक खुलासा करते हुए डा. चाक ने कहा कि आई.एस. ने भी अमरीका और पश्चिम में एक व्यक्ति द्वारा हिंसक हमला करवाने के लिए इन्टरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफार्म को इस्तेमाल किया है क्योंकि नेताहीन विरोध के उभार में सूचना तकनीक बहुत अहम रही है। संगठनात्मक ढांचे के तौर पर सूचना तकनीक कट्टर इस्लामी लहरों के लिए भी उतनी ही सार्थकता रखती है, जितनी कि कट्टर दाएंपक्षियों के लिए। उन्होंने चौकस करते हुए कहा कि यह तकनीक भारत में अकेले व्यक्ति या अर्ध-स्वतंत्र संगठनों को आतंकवादी हमलों के लिए प्रोत्साहन देने की ख़ातिर भी असरदार ढंग से इस्तेमाल की जा सकती है। इस बात की तरफ इशारा करते हुए कि अकेले व्यक्तियों द्वारा किये जाने वाले हमलों से निपटना बड़ा मुश्किल है, उन्होंने कहा, ‘अफगानिस्तान के क्षेत्रों में सक्रिय आईएस अमरीका पर हमला करने के सम्बन्ध में कुछ समय से यह तकनीक इस्तेमाल कर रही है और इस बात का कोई कारण नहीं कि दिल्ली, मुम्बई, बैंगलोर, चेन्नई और लुधियाना जैसे बड़े शहरों को निशाना बनाने वाली ऐसी कार्यवाही क्यों नहीं की जा सकती। इससे पहले, अपने स्वागती भाषण में, डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता ने ताज़ा सुरक्षा हालात और इन्टरनेट और ऑनलाइन सोशल मीडिया मंचों के प्रयोग बारे संक्षिप्त में जानकारी दी। श्री गुप्ता ने भरोसा दिया कि पंजाब पुलिस कट्टरवाद और आतंकवाद की दोहरी चुनौतियों के मुकाबले के लिए अपना सामथ्र्य लगातार बढ़ा रही है। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने मुख्य मेहमान को यादगारी चिह्न भेंट किया। पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस के अधिकारियों और पुलिस, खुफिय़ा विभाग और सुरक्षा विभाग के साथ जुड़े सदस्यों ने समागम में हिस्सा लिया।जि़क्रयोग्य है कि पंजाब पुलिस ने पूर्व डी.जी.पी. स्व. के.पी.एस. गिल जिन्होंने आतंकवाद के विरुद्ध साहसिक लड़ाई में पंजाब पुलिस का नेतृत्व किया था, की याद में पिछले साल भाषणों की सालाना श्रृंखला आरंभ की थी। पहला के.पी.एस. गिल यादगारी लैक्चर के समय जम्मू-कश्मीर के समकालीन राज्यपाल एन.एन. वोहरा ने भाषण दिया था।

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