बठिंडा थर्मल प्लांट की जगह पर लगने वाले प्रोजैक्ट पंजाब के विकास को देंगे बढ़ावा- मनप्रीत सिंह बादल

वित्त मंत्री ने कहा कि बठिंडा थर्मल प्लांट की जगह पर पंजाब का सबसे बड़ा औद्योगिक पार्क स्थापित किया जाएगा

चंडीगढ़, 23 जूनः  पंजाब के वित्त मंत्री स. मनप्रीत सिंह बादल ने आज कहा कि घाटे का सौदा और प्रदूषण का साधन बने बठिंडा थर्मल प्लांट को बंद करने के उपरांत इसकी जगह पर लगने वाले प्रोजैक्ट पंजाब के विकास को नई दिशा प्रदान करेंगे। इस प्लांट की जगह पर पंजाब के सबसे बड़े औद्योगिक पार्क के निर्माण के लिए रास्ता साफ होगा। 

आज यहाँ एक प्रैस काॅन्फ्रेंस के दौरान पत्रकारों को संबोधन करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि बठिंडा थर्मल प्लांट वातावरण, आर्थिक और प्रशासनिक कारणों के चलते तीन साल पहले बंद हो गया था परन्तु इस संबंधी हाल ही में मंजूर हुई योजना से दक्षिणी पंजाब की आर्थिकता बुलन्दियों को छूएगी।    वित्त मंत्री ने चीन से कारोबार समेटने वाली कंपनियों को बठिंडा के नये औद्योगिक कंपलैक्स में निवेश का न्योता देते हुए कहा कि बठिंडा नये औद्योगिक केन्द्र के तौर पर उभरेगा। इसके अलावा, बठिंडा शहर को 164 एकड़ जल स्त्रोत और झीलें मिलेंगी, जो पहले थर्मल प्लांट का हिस्सा थे।

इसी तरह, इस प्लांट के बंद होने के कारण खाली हुई पावर कालोनी, जो 280 एकड़ क्षेत्रफल में फैली हुई है, में पूरी सिविल और पुलिस लाईन के अधिकारियों और मुलाजिमों को रिहायशी सुविधा मिलेगी। इसके अलावा बठिंडा वासियों को कोयले वाले इस बिजली प्लांट की तरफ से फैलाए जा रहे प्रदूषण से राहत मिली है।   

वित्त मंत्री ने बताया कि बठिंडा थर्मल प्लांट 1974 में स्थापित किया गया था और यह पंजाब का सबसे पुराना प्लांट था, जो अपनी 25 साल की असली मियाद पार कर चुका था। केंद्रीय बिजली एजेंसी (सी.ई.ए.) के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी गैर-व्यवहार्य थर्मल प्लांट, जो 25 साल की मियाद पूरी कर चुके हैं, को बंद कर दिया जाना है।   

बठिंडा थर्मल प्लांट में बिजली उत्पादन की लागत 7.70 रुपए प्रति यूनिट से अधिक थी जबकि पंजाब सरकार इस समय 2.30-2.70 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीद रही है। उन्होंने बताया कि यह थर्मल प्लांट सिर्फ 7.23 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर पर चल रहा था, जिस कारण यह व्यवहार्य नहीं था। इसके अलावा इस थर्मल प्लांट को केवल चालू हालत में रखने का सालाना खर्च 110 करोड़ रुपए से अधिक था।

    वित्त मंत्री ने बताया कि वन मंत्रालय द्वारा ताप बिजली घरों को फल्यू गैस डीसल्फराइजेशन, सस्पैंडेड पार्टीकुलेट मैटर (एस.पी.एम.) और मर्करी कंट्रोल यंत्र लगाने की पहले ही हिदायत की गई है, जिसके उल्लंघन पर रोजाना 18 लाख रुपए जुर्माना होगा। इस तरह इस प्लांट को चलाने पर राज्य को इस जुर्माने का भार भी वहन करना पड़ना था।    उन्होंने कहा कि इस थर्मल प्लांट को बंद करने के बाद एक भी कर्मचारी, चाहे वह पक्का हो या कच्चा या ठेके पर हो, को नौकरी से नहीं हटाया गया और उनका रोजगार बरकरार रखा गया है। 

पंजाब कैबिनेट के नये फैसले के बारे में विस्तार में जानकारी देते हुए स. मनप्रीत सिंह बादल ने बताया कि इस थर्मल प्लांट के लिए 164 एकड़ में बनी झीलों को अब जलापूर्ति व्यवस्था के साथ जोड़ा जायेगा। बठिंडा में पीने के पानी की सप्लाई नहरी पानी पर निर्भर है और वर्तमान में शहर की जल भंडार क्षमता 10 दिन की है। इन झीलों के जुड़ जाने से शहर की जल भंडार क्षमता 60 दिन तक बढ़ जायेगी। 

इसी तरह 280 एकड़ में बनी पावर कालोनी में पुलिस और सिविल प्रशासन के डिप्टी कमिश्नर से लेकर दर्जा-4 तक के सभी स्टाफ को रिहायश मिल सकेगी। नहीं तो यह कालोनी खंडहर बन जाती। इस तबदीली के द्वारा बठिंडा शहर के केंद्र में 65 एकड़ जगह खाली होगी जहाँ पंजाब में से नवीन और सबसे आधुनिक किस्म का सैंट्रल कमर्शियल कंपलैक्स बनाया जायेगा।    इसके अलावा 1320 एकड़ जमीन, जो प्लांट और राख भंडार के लिए इस्तेमाल की जाती थी, को इंडस्ट्रियल पार्क में तबदील किया जायेगा, और जो पंजाब का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल पार्क होगा।

पंजाब सरकार यहाँ फार्मास्यूटीकल इंडस्ट्रियल पार्क बनाने के लिए भारत सरकार के साथ संपर्क कर रही है, जोकि देश में इस किस्म के तीन पार्कों में से एक होगा। शिक्षा और चिकित्सा के केन्द्र के तौर पर विकसित हुआ बठिंडा इससे औद्योगिक केंद्र भी बन जायेगा। यहाँ पहले से ही स्थित रेलवे लाईन का भी इस इंडस्ट्रियल पार्क के विकास में बड़ा योगदान होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद यह बठिंडा के सर्वपक्षीय विकास के लिए सबसे बड़ा वरदान होगा।

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