कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर काले चने वितरित करने के लिए परिवार की बजाय प्रति व्यक्ति का पैमाना तय करने की माँग की

मौजूदा दिशा-निर्देशों के मुताबिक पंजाब में अनाज 14.1 लाख प्रवासी मज़दूरों को मिलेगा परन्तु चने सिफऱ् 3.6 प्रवासी परिवारों को ही मिल सकेंगे


चंडीगढ़, 16 मई:नपंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज केंद्र सरकार को काले चने बाँटने के मापदण्डों में तबदीली करके प्रति परिवार की बजाय प्रति व्यक्ति करने की माँग की जिससे कोविड -19 के लॉकडाउन के दरमियान प्रवासी मज़दूरों को अनाज का एक सामान वितरण यकीनी बनाई जा सके।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर केंद्रीय उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय को इस सम्बन्धी हिदायतें जारी करने की माँग की है क्योंकि मंत्रालय के मौजूदा दिशा -निर्देश से प्रवासी मज़दूरों के साथ-साथ राज्य सरकार के लिए दिक्कतें खड़ी हो जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री की तरफ से 30 मार्च, 2020 के पत्र के मुताबिक उनकी अपील को स्वीकृत कर लेने के लिए उनका धन्यवाद किया है जिससे प्रवासी मज़दूरों को प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत अनाज और दालों का लाभ हासिल होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रवासी मज़दूरों की बुरी हालत को उजागर किया था। उन्होंने बताया कि केंद्रीय वित्त मंत्री ने इस सम्बन्धी ऐलान किया है जिससे देश भर में 8 करोड़ प्रवासी कामगारों को फ़ायदा होगा।
केंद्रीय उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की तरफ से 15 मई को जारी दिशा निर्देशों के अनुसार दो महीनों के लिए गेहूँ का वितरण 5 किलो प्रति व्यक्ति के हिसाब के साथ किया जाना था जबकि उक्त समय के लिए काले चने हर घर के लिए एक किलो प्रति महीना के हिसाब से वितरित किये जाने हैं।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि इसका मतलब गेहूँ का लाभ राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट (एन.एफ.एस.ए) के राज्य के लाभपात्रियोंं में से 10 फीसद प्रवासी कामगार, जोकि 14.1 लाख बनते हैं, को पहुँचेगा जबकि काले छोलों का लाभ सिफऱ् 3.6 लाख प्रवासी कामगार परिवारों को मिल सकेगा।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि जब ज़्यादातर प्रवासी कामगार अपने परिवारों के बिना आते हैं, ऐसे में जहाँ वह अस्थाई तौर पर रहते हैं यहाँ परिवारों के रूप में ऐसा लाभ देने का कोई अर्थ नहीं बनता।

उन्होंने आगे कहा कि गेहूँ और चने वितरण सम्बन्धी जारी अलग-अलग हिदायतों से ऐसी स्थिति पैदा हो गई है कि राज्य को 14.1 लाख गेहूँ के पैक्ट सिफऱ् 3.6 लाख छोलों के पैकटों के साथ बाँटने पड़ेंगे।

समझनेयोग्य है कि पंजाब में बड़ी संख्या में परिवारों से बिना रह रहे प्रवासी कामगारों को गेहूँ का लाभ तो प्राप्त होगा परन्तु काले चने नहीं मिल सकेंगे। उन्होंने कहा कि छोलों का लाभ चार व्यक्तियों वाले परिवार को दिए जाने के कारण इसका फ़ायदा केवल कम संख्या में प्रवासी कामगारों को ही मिल सकेगा जबकि बड़ी संख्या प्रवासी कामगारों में इससे बेचैनी पैदा होगी।
—— ———–

Thepunjabwire
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
error: Content is protected !!