पुलिस कर्मचारियों के लिए ‘होम अवे फ्रॉम होम’ सुविधा स्थापित की जाएगी

कोविड-19 के विरुद्ध अगली कतार में डटे पुलिस कर्मचारियों को सभी सुरक्षा उपकरण मुहैया करवाए जाएंगे

चंडीगढ़, 20 अप्रैल: कोविड-19 के विरुद्ध अगली कतार में डटे पंजाब पुलिस के जवानों के लिए अब जि़लों में जहाँ वह ड्यूटी कर रहे हैं, ‘होम अवे फ्रॉम होम’ सुविधा स्थापित की जाएगी, जहाँ संभावित / संदिग्ध संक्रमण के मामलों को होम क्वारंटाइन के लिए सारी ज़रूरी सुविधा उपलब्ध होंगी।  अगली कतार में डटे उच्च जोखि़म वाले स्थानों पर ड्यूटी कर रहे सभी पुलिस कर्मचारियों को किसी भी संक्रमण से संपूर्ण सुरक्षा यकीनी बनाने के लिए उनको सभी सुरक्षा उपकरण (फुल बॉडी प्रोटैक्टिक वेयर) जैसे पीपीई किटें, एन-95 मास्क और ट्रिपल लेयर मास्क और दस्ताने भी मुहैया करवाए जाएंगे। 

सभी पुलिस कमिश्नरों और एसएसपीज़ को हिदायत की गई है कि वह अपने जिले में तैनात पुलिस कर्मचारियों में किसी भी फ्लू या कोविड जैसे लक्षणों की जल्द पहचान के लिए प्रभावशाली उपाय करें, जिससे उनकी जल्द देख-रेख, इलाज और आराम को यकीनी बनाया जा सके।  यह अहम फ़ैसले डीजीपी दिनकर गुप्ता द्वारा राज्य में स्थिति का जायज़ा लेने के लिए सभी जिला पुलिस प्रमुखों और रेंजों के आईजी / डीआईजी के साथ एक वीडियो कॉन्फ््रेंस के दौरान लिए गए, क्योंकि देशव्यापी तालाबन्दी का दूसरा पड़ाव सोमवार सुबह से अमल में आ गया है। मीटिंग में स्टेट हैडक्वाटर के अधिकारियों, 7 ए.डी.जी.पीज़ जिनको जिला पुलिस के कामकाज और कोविड संकट के मद्देनजऱ लगाए गए कफ्र्यू के अमल की निगरानी करने के लिए पुलिस रेंजों का इंचार्ज बनाया गया है, भी उपस्थित थे। 

वीडियो कॉन्फ््रेंस के दौरान यह फ़ैसला लिया गया कि पुलिस कर्मचारियों जिनके संक्रमण से प्रभावित होने का शक हो, को एकांतवास के लिए घर भेजकर उनके परिवारों को किसी भी जोखि़म में डालने की बजाय, ऐसे पुलिस कर्मचारियों के लिए जिला होम क्वारंटाइन सैंटर स्थापित किए जाएंगे। इन केन्द्रों की स्थापना के लिए हरेक जिले में ज़रूरी स्थानों / इमारत की पहचान की जाएगी। जब भी किसी पुलिस अधिकारी की पहचान एक कोविड पॉजि़टिव मरीज़ के प्राईमरी या सेकेंडरी संपर्क के तौर पर होती है तो उसको इन सैंटरों में क्वारंटीन के अधीन रखा जाएगा, जिसका प्रयोग उन व्यक्तियों को क्वारंटाइन करने के लिए भी किया जाएगा जिनकी टेस्टिंग हो चुकी है, परन्तु रिपोर्ट का इन्तज़ार है।

यहाँ पुष्टि किए गए कोविड केस के प्राईमरी या सेकेंडरी संदिग्ध केस भी आ सकते हैं, इसलिए नमूने लेने की तारीख़ से रिपोर्ट आने तक क्वारंटाइन ज़रूरी हो जाता है।  डीजीपी ने कहा कि इन केन्द्रों का प्रयोग उच्च जोखि़म वाले संपर्कों के लिए भी किया जाएगा, जिनकी रिपोर्ट नेगेटिव होने के बावजूद भी 14 दिनों (संपर्क में आने की तारीख़ से) के लिए क्वारंटाइन में रखना ज़रूरी हो।  यह सुविधा क्वारंटाइन किए गए व्यक्तियों की प्राईमरी ज़रूरतों जैसे कि रहने, पौष्टिक भोजन का प्रबंध, साफ़-सफ़ाई की व्यवस्था, नियमित स्वास्थ्य जांच, एमरजैंसी यातायात, एमरजैंसी डॉक्टरी सहायता, मनोरंजन आदि से पूरी तरह लैस होंगी।  स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला पुलिस के साथ लगाए गए मैडीकल डॉक्टरों को इन सुविधाओं का इंचार्ज बनाया जाएगा और बटालियनज़ में तैनात डॉक्टरों को भी इस मंतव्य के लिए नामांकित किया जाएगा, जिससे ज़रूरत पडऩे पर उनकी सेवाएं ली जा सकें। इन केन्द्रों में उपयुक्त पैरा-मैडीकल स्टाफ भी होगा। श्री गुप्ता ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो प्राईवेट सैक्टर से सहायता ली जा सकती है।

डीजीपी के अनुसार ए.डी.जी.पी. वैलफेयर वी. नीरजा को कोविड के विरुद्ध जंग में अगली कतार में डटे पुलिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर नियमित निगरानी रखना यकीनी बनाने के लिए राज्य स्तरीय समन्वयक के तौर पर नामज़द किया गया है। वह ‘जिला होम क्वारंटाइन सेंटरों’ की स्थापना और कामकाज का भी निरीक्षण करेंगे, जिसकी निगरानी रेंजों और कमिश्नरेटज़ के ए.डी.जी.पी. और रेंजों के आई.जी.पीज़ / डी.आई.जीज़ करेंगे। हर जिला पुलिस प्रमुख राज्य के पुलिस कर्मचारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य कल्याण के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों के सही तालमेल को यकीनी बनाने के लिए अपने जिले में एक डीएसपी / एसीपी रैंक के अधिकारी को डीएसपी वैलफेयर के तौर पर नियुक्त करेंगे।

इसी दौरान डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों को राज्य सरकार की पॉलिसी के अनुसार नॉन-कंटेनमैंट /हॉटस्पॉट ज़ोनों में औद्योगिक इकाईयों, निर्माण स्थलों, सडक़ निर्माण प्रोजैक्टों के लिए पाबंदियों में छूट को यकीनी बनाते हुए कफ्र्यू को सख्ती से लागू करने सम्बन्धी मुख्यमंत्री के निर्देशों से अवगत करवाया और यह भी कहा कि इन सभी गतिविधियों के दौरान देह से दूरी बनाए रखने के नियमों, उपयुक्त सैनिटाइज़ेशन और साफ़-सफ़ाई आदि की सख्ती से पालना को यकीनी बनाया जाए।  पुलिस कमिश्नरों और एस.एस.पीज़ को भी यह यकीनी बनाने के निर्देश दिए गए हैं कि राज्य में कोरोनावायरस के फैलाव को रोकने के लिए कटाई और खऱीद कार्यों को सुरक्षित और सुचारू ढंग से चलाया जाए।  इससे पहले मीटिंग के दौरान एसीपी उत्तरी, लुधियाना श्री अनिल कोहली को श्रद्धाँजलि भेंट की गई, जिन्होंने कोरोनावायरस के विरुद्ध लड़ाई में अपनी जान दी। चंडीगढ़ हैडक्वाटर और रेंजों और जि़लों के सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा कोरोना जंग के योद्धाओं अनिल कोहली और दविन्दर कुमार, टाऊन इंस्पेक्टर, जूनीयर, इन्दौर की याद में दो मिनट का मौन रखा गया। 

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