प्रसूति के दौरान माँ की मौत होने के हरेक मामले की गहराई से जांच करने के आदेश जारी


उच्च स्तरीय मीटिंग में स्वास्थ्य विभाग के मुख्य प्रोग्रामों और स्कीमों का लिया जायज़ा


चंडीगढ़
, 10 जनवरी। प्रसूति के दौरान माँ की मौत होने के मामलों को जड़ से ख़त्म करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री स. बलबीर सिंह सिद्धू द्वारा ऐसे हरेक मामले की गहराई से मैडीकल जांच करने और कोताही बरतने वाले अधिकारियों और स्टाफ की जवाबदेही तय करने के हुक्म जारी किये गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने सभी जि़लों का माईक्रो-प्लान तैयार करने के निर्देश जारी किये जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी ए.एन.एमज़ के पास अपने क्षेत्र की सभी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की सूची एक रजिस्टर में हो जिससे बच्चे के जन्म से पहले गर्भवती महिलाओं के चैकअप और फॉलोअप को यकीनी बनाया जा सके।

उन्होंने यह भी कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में प्रसूति के दौरान माँ को सम्मानजनक देखभाल मुहैया करवाई जाये और जिलों द्वारा रैफरल प्रोटोकोल भी तैयार किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि एस.एम.ओज़ यह यकीनी बनाएं कि अस्पताल में से छुट्टी मिलने के बाद ए.एन.एमज़ गर्भवती महिलाओं और नयी बनी माताओं के घर जाएं।

दवाओं और उपकरणों की स्थिति का जायज़ा लेते हुए मंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य भर में ज़रूरी और आम दवाओं की सप्लाई कायम रखी जा रही है। उन्होंने यह यकीनी बनाने के लिए कहा कि अस्पताल खरड़ (मोहाली), बठिंडा और वेरका (अमृतसर) में सम्बन्धित क्षेत्रीय ड्रग वेयरहाऊसों से सीधे तौर पर दवा प्राप्त करें। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सीनियर मैडीकल अधिकारियों को दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने की जि़म्मेदारी सौंपी गई है जिससे उनसे सम्बन्धित अस्पतालों में मुफ़्त दवाएँ आसानी से मुहैया करवाई जा सकें। उन्होंने विभाग के उच्च अधिकारियों को दवाओं की माँग को पहले से ही ऑनलाइन ढंग के द्वारा यकीनी बनाने की हिदायत भी दी।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इससे पहले पंजाब सरकार ने दवा बूपरोनोरफीन की कीमत को घटा दिया था जिससे मरीज़ों पर वित्तीय बोझ काफ़ी कम हुआ है। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के अथक यत्नों स्वरूप पंजाब के नौजवानों ने नशा-आतंकवाद से लडऩे के लिए राज्य के साथ मिलकर काम किया है और वह नशों के बुरे प्रभावों बारे अच्छी तरह जानकार हैं। उन्होंने आगे कहा कि राज्य भर में 191 ओओएटी क्लीनिकों से 1.2 लाख से अधिक मरीज़ इलाज सेवाएं प्राप्त कर रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर श्री काहन सिंह पन्नू को मिलावटी और घटिया दर्जे के खाद्य पदार्थों के कारोबार में शामिल विक्रेताओं और उत्पादकों के खि़लाफ़ मुहिम को और तेज़ करने के लिए भी कहा।

उन्होंने प्रशंसा करते हुए कहा कि यह गर्व वाली बात है कि मिलावटखोरों के खि़लाफ़ की गई बड़ी कार्यवाही के बाद पंजाब में पौष्टिक और स्वच्छता सम्बन्धी खाद्य पदार्थों के मानक में काफ़ी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि दूध उत्पादक भी अपने दूध और अन्य चीज़ों के लाभदायक भाव ले रहे हैं।
मीटिंग के दौरान सरबत सेहत बीमा योजना, आर.बी.एस.के., वैकटर और पानी से होने वाली बीमारियों को कंट्रोल करने के लिए प्रांतीय प्रोग्राम, टी.बी. कंट्रोल प्रोग्राम और राज्य सरकार के अन्य प्रमुख प्रोग्रामों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
मीटिंग में अन्यों के अलावा स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव श्री अनुराग अग्रवाल, सी.ई.ओ. राज्य स्वास्थ्य एजेंसी कम एम.डी. एन.एच.एम. श्री कुमार राहुल, पी.एच.एस.सी. के एम.डी. श्री मनवेश सिंह सिद्धू, डायरैक्टर परिवार कल्याण डॉ. रीटा भारद्वाज, स्वास्थ्य मंत्री के ओ.एस.डी. डॉ. बलविन्दर सिंह, एन.एच.एम. के डायरैक्टर परविन्दर पाल सिंह सिद्धू, डायरैक्टर प्रोकीओरमैंट डॉ. राजेश कुमार और स्वास्थ्य विभाग के अन्य सीनियर अधिकारी भी शामिल थे।

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