पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र को जी.एस.टी. की बकाया राशि जारी करने की अपील, पाँच साल से आगे समय सीमा बढ़ाने की भी मांग

चंडीगढ़, 20 फरवरी: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को राज्य के जी.एस.टी. मुआवज़े की बकाया पड़ी राशि जारी करने की अपील की जो कि अप्रैल 2020 से जनवरी 2021 तक कुल 8253 करोड़ रुपए बनती है।मुुख्यमंत्री ने आगे आने वाले वित्त वर्ष में मासिक जी.एस.टी. की मुआवज़ा राशि जारी करने की राज्य की माँग दोहराई। उन्होंने जी.एस.टी. मुआवज़े की समय सीमा मेें पंजाब जैसे राज्यों के लिए मौजूदा पाँच वर्षों से अधिक विस्तार करने की भी माँग की जिन्होंने अपने राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा स्थायी तौर पर गवा लिया है ख़ासकर अनाज पर खरीददारी टैक्स जमा करने के कारण और मुआवज़े की समय सीमा के ख़त्म होने के बाद राजस्व की भारी कमी झेल रहे हैं।

नीति आयोग की मीटिंग में अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ केंद्रीय योजनाओं अधीन फंडों को लागू करने वाली एजेंसियों को सीधे तौर पर भेजने वाली राज्य के कंसोलिडेटिड फंड को बाइपास करने की प्रथा न सिफऱ् संविधान की धाराओं का उल्लंघन करती है बल्कि यह सहकारी संघवाद की भावना के भी उलट है। उन्होंने कहा कि इसलिए भारत सरकार को विनती की जाती है कि केंद्रीय योजनाओं अधीन सभी फंडों को राज्य के कंसोलिडेटिड फंड के द्वारा भेजा जाए और राज्यों को इन प्रोजेक्टों के प्रभावशाली ढंग से और ज्यादा वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ निगरानी करने की आज्ञा दी जाये।यह बताते हुए कि वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 की अंतिम रिपोर्ट में 15वें वित्त आयोग ने पंजाब राज्य के लिए कुछ विशेष क्षेत्रों और राज्य की विशेष ग्रांटों की सिफ़ारिश की है जिसकी राशि क्रमवार 3442 करोड़ रुपए 1545 करोड़ रुपए बनती है, को अभी तक भारत सरकार ने मंज़ूरी नहीं दी।

उन्होंने अफ़सोस ज़ाहिर करते हुए केंद्र से अपील की कि वह राज्य को ज़रुरी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए यह विशेष अनुदान मुहैया करवाएं और इसकी आर्थिकता को अपेक्षित मज़बूती प्रदान करें।कारोबार करने में आसानी को और बढ़ाने के लिए जिसके स्वरूप पिछले 4 वर्षों में पंजाब में 70,000 करोड़ रुपए का ताज़ा निवेश हुआ है, मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि भारत सरकार के मंत्रालयों और एजेंसियों आदि जैसे कि एम.ओ.ई.एफ. एन.एच.ए.आई., ए.ए.आई. द्वारा आज्ञा पालन सम्बन्धी समय-समय पर की जाती समीक्षा का बोझ घटाया जाये। उन्होंने आगे यह भी माँग की कि सभी ओर से ज़मीन के साथ घिरे (बंदरगाह रहित) राज्य पंजाब के लिए ढुलाई और यातायात में सुधार लाने के लिए कदम उठाए जाएँ क्योंकि राज्य बंदरगाहों से दूरी के कारण माल की ढुलाई की अपनी पूरी संभावना तक पहुँचने में असमर्थ है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह पहुँच से बाहर वाले इलाकों और ऐसे राज्यों जो पश्चिमी और पूर्वी तटों से 1000 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित हैं, में औद्योगीकरण की सुविधा के लिए एक योजना बनाएं जिसमें औद्योगिक इकाईयों को उनके तैयार उत्पादों और खऱीदे गए  कच्चे माल की ढुलाई पर सब्सिडी दी जाये।

मुख्यमंत्री ने नाशवान खेती उत्पादों समेत प्रमुख निर्यात वस्तुएँ मध्य पूर्वी और सी.आई.एस. (कॉमनवैल्थ ऑफ इंडीपैंडट स्टेटस) देशों को दिल्ली एयर कार्गो टर्मिनल की बजाय सीधे तौर पर पंजाब के हवाई अड्डों (मोहाली, अमृतसर और लुधियाना (आने वाला) हवाई अड्डों) से भेजने के लिए भी भारत सरकार से आर्थिक तौर पर प्रोत्साहन माँगा। इसके अलावा पंजाब जैसे राज्य जो दूसरे देशों के साथ अंतरराष्ट्रीय सरहद साझा करते हैं, को सडक़ के द्वारा सरहद पार व्यापार करने की भी आज्ञा दी जा सकती है।

कैप्टन अमरिन्दर ने अपनी सरकार की पंजाब को विशेष वर्ग का दर्जा देने की माँग को दोहराया क्योंकि यह रणनीतक तौर पर एक सक्रिय अंतरराष्ट्रीय सरहद के साथ स्थित है। उन्होंने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की औद्योगिक विकास स्कीम की तजऱ् पर पंजाब के सरहदी और कंडी जिलों में उद्योगों के साथ कैपिटल सब्सिडी, बीमा सब्सिडी और उद्योगों को जी.एस.टी. मुआवज़े की प्रतिपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए विशेष वर्ग के दर्जे के अंतर्गत फंड का वितरण किया जाये।

बुनियादी ढांचे के मुद्दे सम्बन्धी मुख्यमंत्री ने भारत सरकार को रेलवे मंत्रालय को ब्यास से कादियाँ तक के नये और अहम रेलवे लाईन निर्माण प्रोजैक्ट में तुरंत शुरुआत करके इसमें तेज़ी लाने के लिए कहा। उन्होंने रेलवे मंत्रालय को मोहाली से राजपुरा तक नयी रेलवे लाईन के विशेष रेलवे प्रोजैक्ट को मंज़ूरी देने के लिए और खेमकरण-पट्टी से फिऱोज़पुर-मक्खू के दरमियान 25 किलोमीटर के नये रेल लिंक के निर्माण कार्य में तेज़ी लाने के लिए कहा।मुख्यमंत्री ने कार्यकुशलता पहलकदमियों और नई पेशकदमियों के लिए प्रत्येक केंद्रीय बुनियादी ढांचा स्कीम के लिए अलग उपबंध की भी माँगी की जो कि 100 प्रतिशत केंद्रीय अनुदान हो। उन्होंने प्रधानमंत्री को राज्य की तरफ केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय को हिमाचल प्रदेश के पड़ोसी जिलों के बराबर पंजाब के पहाड़ी /नीम पहाड़ी इलाकों में ग्रामीण जल स्पलाई स्कीमों के संशोधित वितरण आधार बारे भेजी गए प्रस्ताव को मंज़ूरी देने के लिए भी कहा।

इस पक्ष पर गौर करते हुए कि सडक़ यातायात और राजमार्ग मंत्रालय की तरफ से राज्य में बड़ी जि़ला सडक़ों और सात प्रांतीय राजमार्गों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने की बात सैद्धांतिक तौर पर स्वीकृत कर ली गई है और इस सम्बन्धी भारत सरकार को विस्तृत प्रोजैक्ट रिपोर्ट भेजी जा चुकीं हैं, मुख्यमंत्री ने इन सडक़ों को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किये जाने हेतु जल्द ही नोटिफिकेशन जारी करने की भी माँग की।कोविड महामारी दौरान ऑनलाइन शिक्षा पर और ज्यादा ध्यान केंद्रित किये जाने का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री ने भारत सरकार को खुले दिल से राज्यों को फंड मुहैया करवाने के लिए कहा जिससे डिजिटल ढांचे, ऑनलाइन शिक्षा के लिए सहायक होने वाले उपकरणों आदि पहलकदमियों को लागू करके बड़े स्तर पर डिजिटल युग का साथी बना जा सके।

Thepunjabwire
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