राष्ट्रीय मुद्दों पर आम सहमति की नीति पर चलें न कि टकराव की नीति पर: सरदार प्रकाश सिंह बादल

संघवादी विभिन्नता के लिए लोकतांत्रिक बगावत आवश्यक, अकालियों का मार्च पार्टी की पंथक तथा लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुसार था

शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ ताकत का इस्तेमाल करके पूर्व मुख्यमंत्री ने निंदा की

चंडीगढ़/02अक्टूबर: पंजाब के पांच बार मुख्यमंत्री रहे सरदार परकाश सिंह बादल ने आज भारत सरकार के साथ ही राज्य सरकारों से कहा है कि वह आम सहमति तथा रचनात्मक समझौते की नीति का पालन करें न कि संवेदनशील मुददों पर सीधे राष्ट्रीय टकराव की नीति अपनाएं। उन्होने कहा कि देश की सरकार की असहनशील पहुंच के कारण देश की छवि को बिगाड़नी नही चाहिए।

सरदार बादल ने कहा कि सारे राज्य में कल इस बात का उत्साह था कि अकाली लहर वास्तव में संकटग्रस्त किसानों का समर्थन किया था और वास्तव में पंथक लहर बन गई थी। उन्होने कहा कि जो लोकतंत्र पंथक परंपराओं की बात करते हैं, उन्हे लिए यह देखने वाला बड़ा अवसर था।

यहां एक प्रेस बयान जारी करते हुए देश के सबसे वरिष्ठ राजनीतिज्ञ ने सरकार को याद करवाया कि आम सहमति की जरूरत है। उन्होने कहा कि टकराव खासतौर पर जब हिंसक टकराव बन जाए तो फिर वह देश के लिए खतरनाक तथा नुकसानदेह हो सकता है जिससे हमारी अमीर विभिन्नता का मान सम्मान भी खत्म हो जाता है। उन्होने कहा कि हमारी विभिन्नता की हर हालत में न सिर्फ रक्षा करनी चाहिए पर हर व्यक्ति जो हमारे देश की किसमत बदलने लगा हुआ है, उसका भी ख्याल रखना चाहिए।

सरदार बादल ने कहा कि वास्तव में सहकारी संघवाद के सम्मान की आवश्यकता एक तरफ है जबकि लोकतांत्रिक बगावत दूसरी तरफ है। उन्होने कहा कि हमारी धार्मिक, भाषा, क्षेत्रीय तथा राजनीतिक विभिन्नता के लिए सेहतमंद मान सम्मान हमारे संविधान की धूरी है तथा सिर्फ लोकतांत्रिक तथा संघीय पहुंच ही हमें विश्व का राजनीति, आर्थिक तथा नैतिक नेता बना सकती है।

अकाली दल के वरिष्ठ नेता ने कल रात चंडीगढ़ पुलिस द्वारा अकाली वर्करों खासतौर पर शंातिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ धक्केशाही करने को बेहद हैरानीजनक तथा गलत कार्रवाई करार दिया। उन्होने कहा कि प्रदर्शनकारियों के विचार तथा मांगों में कुछ भी गैर सवैंधानिक यां गलत नही है। उन्होने कहा कि शंातिपूर्ण , लोकतांत्रिक तरीके से अपनीी बात सुनाना हर किसी का मौलिक अधिकार है। उन्होने दोहराया कि यदि वह राज्यपाल के पद पर होते तो फिर वह नंगे पैर चलकर शंातिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वालों को जाकर मिलते।

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