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दिल वालों की दिल्ली हुई दंगे वालों की दिल्ली, गुनेहगार कौन?

दिल वालों की दिल्ली हुई दंगे वालों की दिल्ली, गुनेहगार कौन?
  • PublishedFebruary 26, 2020

सदियों से भारत की पहचान रही दिल्ली, भारत की राजधानी दिल्ली, भारत की सत्ता का केंद्र दिल्ली, न जाने ऐसे कितने विशेषण है जिससे दिल्ली को पहचाना जाता है। दिल्ली की मिली जुली संस्कृति पर सारा भारत गर्व करता है जिसके चलते दिल्ली को दिल वालों के नाम से भी जाना जाता है। परन्तु अब यह दिल वालों की दिल को दंगे वालों की दिल्ली के तौर पर नया नाम दिया जा रहा है ।

आखिर ऐसा क्या हो गया कि देश का ‍’दिल’ ही सुलगने लगा है और जब दिल सुलगता है तो स्वाभाविक रूप से इसका असर पूरे ‘शरीर’ पर पड़ना लाजिमी है। जो हुआ बिलकुल भी अच्छा नहीं हुआ। लेकिन, हर किसी के मन में एक सवाल जरूर है कि आखिर दिलवाली दिल्ली में हिंसा का गुहगार है कौन ? दिल वालों की दिल्ली को दंगे वालों की दिल्ली किसने किया ?

दरअसल, दिल्ली हिंसा की ‘चिंगारी’ तो नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के साथ ही निकलने लगी थी। इसी चिंगारी को भड़काने का काम विभिन्न समुदाय के नेताओं ने अपने हाथों में लिया। परन्तु देश के हर हिस्से पर कड़ी नजर रखने वाली खुफिया एजेंसियों को भनक तक नही लग पाई या उनकी ओर से लापरवाही बरती गई।

यदि सही समय पर सूचना मिल जाती और साझा कर दी जाती और सही कदम उठा लिया जाता तो शायद स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती। राजनेताओं के बयानों ने इस चिंगारी को और भड़काने का ही काम किया। चाहे फिर वह देशद्र‍ोहियों को गोली मारने की बात हो या फिर 100 करोड़ पर 15 करोड़ के भारी पड़ने की बात हो। वैसे नेता का दायित्व ही चीजों को संभालना होता है, बिगाड़ना नहीं परन्तु जो नेता चीजों को बिगाड़े वह नेता नही कहलाए जाते।

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तो अपने ताजा बयान में गृहमंत्री अमित शाह निशाने पर ले लिया है और उनका इस्तीफा भी मांग लिया। उनका कहना है कि दिल्ली सुलगती रही, 3 दिन तक अमित शाह क्या करते रहे? उन्होंने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को भी नहीं बख्शा। केजरीवाल से भी उन्होंने यही सवाल पूछ लिया कि वे कहां थे और क्या कर रहे थे। सच भी है, गृहमंत्री होने के नाते शाह अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते।

सोनिया गांधी का बयान भले ही राजनीतिक से प्रेरित हो सकता है, लेकिन इस बात से बिलकुल भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की लापरवाही ज्यादा दिखाई दी। दिल्ली पुलिस पर तो चौतरफा आरोप भी लगे कि हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में पुलिस कहीं नजर ही नहीं आई।

सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि खुफिया एजेंसियों का यह फेलियर ऐसे समय में सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप परिवार सहित भारत के दौरे पर थे। कल्पना कीजिए एक कंकर भी उनकी तरफ उछल जाता तो भारत की पूरी दुनिया में किरकिरी हो जाती।

वैसे किरकिरी तो हिंसा को लेकर भी खूब हो रही है। मोदी जी ने लोगों से शांति की अपील भी कर दी है, उम्मीद करें जल्द ही सब कुछ शांत हो जाए और दिलवालों की दिल्ली में एक बार फिर लोगों की जिंदगी पटरी पर आ जाए। दिल्ली दोबारा दिल्ली वालों की दिल्ली हो ऐसी आशा है।

मनन सैनी

Written By
The Punjab Wire