शाहपुरकंडी डैम प्रोजैक्ट का कार्य युद्ध स्तर पर जारी – सरकारिया

कोविड पाबंदियों के बावजूद अब तक मेन डैम का 45 प्रतिशत कार्य मुकम्मल किया

चंडीगढ़, 25 जूनःकोविड -19 महामारी के फैलाव को रोकने के लिए लगाई गई पाबंदियों के बावजूद शाहपुरकंडी डैम प्रोजैक्ट को समय पर मुकम्मल करने के लिए जल स्रोत विभाग, पंजाब युद्ध स्तर पर कार्य कर रहा है और मुख्य डैम का अब तक 45 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है।यह जानकारी देते हुए पंजाब के जल स्रोत मंत्री स. सुखबिन्दर सिंह सरकारिया ने बताया कि कोविड -19 को रोकने के लिए लगाए गए देशव्यापी लाॅकडाउन के कारण सभी विकास कार्य रुक गए थे। कोविड से बचाव सम्बन्धी ‘मिशन फतह’ के अंतर्गत बताए गए सभी सुरक्षा उपायों को यकीनी बनाते हुए जल स्रोत विभाग ने 29 अप्रैल, 2020 को शाहपुरकंडी डैम प्रोजैक्ट का निर्माण कार्य फिर से शुरू किया है। अब, इस प्रोजैक्ट का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है और मेन डैम का 45 प्रतिशत कार्य पूरा किया जा चुका है।शाहपुरकंडी डैम प्रोजैक्ट के जलाशय की भराई साल 2022 के आधे तक शुरू होने की उम्मीद जाहिर करते हुए स. सरकारिया ने बताया कि इस प्रोजैक्ट में अगस्त, 2023 तक बिजली उत्पादन शुरू होने की आशा है। इससे राज्य में सिंचाई प्रणाली और वातावरण समर्थकीय बिजली उत्पादन में और सुधार आएगा।उन्होंने कहा कि यह माधोपुर हैड वर्कस से शुरू होने वाली नहरी प्रणाली को एकसमान पानी की सप्लाई यकीनी बनाएगा और इस प्रोजैक्ट से पंजाब में तकरीबन 5000 हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए सिंचाई क्षमता पैदा होने की संभावना है और यू.बी.डी.सी. प्रणाली अधीन इस प्रोजैक्ट से 1.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा इस प्रोजैक्ट के मुकम्मल होने पर सालाना 1042 मिलियन यूनिट बिजली पैदा होगी।जिक्रयोग्य है कि रावी नदी पर पठानकोट जिले में रणजीत सागर डैम के 11 किलोमीटर के डाउनस्ट्रीम और माधोपुर हैडवर्कस के 8 किलोमीटर अपस्ट्रीम पर शाहपुरकंडी डैम प्रोजैक्ट बनाया जा रहा है। इससे रावी नदी के पानी का पाकिस्तान को बहाव घटेगा और इसका पंजाब और जम्मू-कश्मीर को लाभ होगा।चीफ इंजीनियर (शाहपुरकंडी डैम प्रोजैक्ट) श्री एस. के. सलूजा ने बताया कि शाहपुरकंडी पावर हाऊस में 206 मेगावाॅट बिजली उत्पादन के अलावा यह प्रोजैक्ट डाउनस्ट्रीम बिजली प्रोजेक्टों के लिए पानी की नियमित सप्लाई यकीनी बनाएगा। इस सरहदी इलाके में इस प्रोजैक्ट से पर्यटन क्षमता पैदा होगी और लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। उन्होंने आगे बताया कि पावर हाऊसों के निर्माण कार्यों के लिए टैंडर जल्द ही जारी किये जाएंगे। पीएसपीसीएल ने पावर हाऊसिज के इलैक्ट्रोमकैनिकल सम्बन्धी कार्यों को बी.एच.ई.एल. को सौंप दिया है।

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