कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने ज़रूरत पडऩे पर नयी मंडियां घोषित करने के अधिकार डिप्टी कमिश्नरों को दिये

चंडीगढ़, 10 अप्रैल:पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व में मंत्रीमंडल ने डिप्टी कमिश्नरों को अपने -अपने जिलों में ज़रूरत के मुताबिक नई मंडियों घोषित करने के लिए अधिकारित किया है जिससे सामाजिक दूरी कायम रखने के साथ-साथ अनाज की निर्विघ्न खरीद को यकीनी बनाया जा सके।मंत्रीमंडल की वीडियो कॉन्फ्ऱेंस के बाद एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि यह मंडियां खरीद कामों के लिए इस साल पहले ही ऐलानी जा चुकी 3800 मंडियों के अतिरिक्त होंगी।

मंत्रीमंडल ने गेहूँ की कटायी और खरीद के प्रबंधों की तैयारियों का जायज़ा लिया जो 15 अप्रैल से शुरू होने जा रही है। यह भी फ़ैसला किया गया कि खरीद प्रबंधों को 11 अप्रैल तक अंतिम रूप देकर नोटीफायी कर दिया जाना चाहिए जिससे क्रमवार ढंग से किसानों की फ़सल का एक -एक दाना खरीदा जा सके।राज्य सरकार 15 जून तक गेहूँ की खरीद बढ़ाने का फ़ैसला पहले ही ले चुकी है। सरकार ने केंद्र से कोविड -19 के संकट के मद्देनजऱ मंडियों में क्रमवार गेहूँ लाने वाले किसानों को मुआवज़ा देने भी माँग की है और केंद्र सरकार ने राज्य की इस माँग के प्रति अभी तक कोई स्वीकृति नहीं भरी।

मंत्रीमंडल ने आगे कहा कि गेहूँ की खरीद के लिए निर्धारित परिचालन प्रक्रिया (ऐस.ओ.पी.) का व्यापक स्तर पर प्रचार किया जाना चाहिए जिससे सैनीटाईजऱों, हाथ धोने के प्रबंधों के उपबंधों समेत सभी प्रोटोकोलों की सख्ती से पालना की जा सके। डी.जी.पी. दिनकर गुप्ता को पहले ही मंडियों के लिए सुरक्षा योजना बनाने के लिए कहा जा चुका है। मंत्रीमंडल को बताया गया कि राज्य में बारदाने की 73 प्रतिशत ज़रूरत पूरी की जा चुकी है और पश्चिमी बंगाल सरकार की तरफ से समय पर उत्पादन न खोलने पर 7.2 लाख बोरियों की बाकी रहती कमी को पी.पी. थैलों के द्वारा पूरा किया जायेगा।

अब तक पश्चिमी बंगाल ने सिफऱ् 27000 बोरियाँ जो तैयार थी, की ढुलाई फिर शुरू की है।अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास विसवाजीत खन्ना ने बताया कि इस साल किसानों को उनके बैंक खातों में सीधी अदायगी करने की प्रणाली शुरू की जानी थी परन्तु अब इसकी बजाय आढ़तियों के द्वारा फ़सल की अदायगी करने के लिए नियमों में संशोधन कियर जा चुका है। मुख्यमंत्री ने इससे पहले इस कठिन समय में निरंतरता और स्थिरता बनाई रखने के लिए यह नियम बदलने का सुझाव दिया था। मंडी बोर्ड की तरफ से 31 मार्च को मियाद खत्म हो रहे आढ़तियों के लायसंसों की मियाद में पहले ही विस्तार किया जा चुका है जो गेहूँ की खरीद होने तक जारी रहेगा। आढ़तियों को खरीद के 48 घंटों के अंदर -अंदर अदायगी कर दी जायेगी और इसके बदले में आढ़तियों की तरफ से अगले 48 घंटों में किसानों को अदायगी करनी पड़ेगी।

खन्ना ने मंत्रीमंडल को बताया कि राज्य में 153 प्रमुख फड़ें, 283 फड़ें, 1430 खरीद केन्द्रों और चावल मिलों समेत 3718 खरीद केन्द्रों की स्थापना की गई है। मंडियों में लगभग 137 लाख मीट्रिक टन गेहूँ आने की आशा है जिसमें से 135 लाख मीट्रिक टन सरकारी एजेंसियों की तरफ से और 2 लाख मीट्रिक टन प्राईवेट व्यापारियों की तरफ से खऱीदी जायेगी। श्री खन्ना ने बताया कि रबी के मौजूदा सीजन के लिए प्रति क्विंटल 1925 रुपए के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खऱीदी की जायेगी जबकि पिछले वर्ष न्यूनतम समर्थन मूल्य 1840 रुपए था।मंडियों में जगह के हिसाब के साथ एक किसान एक दिन या अलग-अलग दिनों के लिए अनेक कूपनों का हकदार होगा जिससे मंडियों में भीड़-भाड़ न हो। मार्केट कमेटियों की तरफ से आढ़तियों को लगभग 27 लाख कूपन जारी किये जाएंगे। एक कूपन पर किसान मंडी में 50 क्विंटल की एक ट्राली लाने का हकदार होगा। 

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