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युवाओं को 57 हजार नौकरियां देने का वादा करके मुख्यमंत्री ने विधानसभा को गुमराह कियाः अकाली दल

युवाओं को 57 हजार नौकरियां देने का वादा करके मुख्यमंत्री ने विधानसभा को गुमराह कियाः अकाली दल
  • PublishedFebruary 26, 2020

कहा कि सरकार ने सदन को बताया कि तीन सालों में सिर्फ 33हजार नौकरियां दी हैं

ढ़िल्लों तथा मजीठिया ने कहा कि मुख्यमंत्री कोरोना वायरस का डर दिखाकर युवाओं को स्मार्ट फोन देने की जिम्मेदारी से भागा

चंडीगढ़/26फरवरीः शिरोमणी अकाली दल ने आज कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यह दावा करके कि कांग्रेस सरकार ने 57 हजार सरकारी नौकरियां दी हैं जबकि पिछले तीन सालों के दौरान सरकार द्वारा दी नौकरियों की वास्तविक संख्या सिर्फ 33 हजार है, न सिर्फ विधानसभा को गुमराह किया है, बल्कि पंजाबियों को भी धोखा दिया है।

विधानसभा की मीडिया गैलरी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अकाली विधायक दल के नेता सरदार शरनजीत सिंह ढ़िल्लों तथा पूर्व मंत्री सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि सरकार ने सदन में एक जवाब देते हुए कहा है कि इसने पिछले तीन सालों में सिर्फ 33 नौकरियां दी हैं। इसके अलावा सरकार ने यह भी खुलासा किया है कि इसने 24 हजार कर्मचारियों की ठेके पर भर्ती की है, जिनकी सेवाओं को किसी भी समय समाप्त किया जा सकता है। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा घर घर नौकरी योजना के तहत 12 लाख नौकरियां देने के वादे की हवा निकल गई है तथा यह संख्या सिर्फ 33 हजार नौकरियों तक ही रह गई है।

सरदार ढ़िल्लों तथा सरदार मजीठिया ने कहा कि मुख्यमंत्री कोरोना वायरस का डर दिखाकर युवाओं को स्मार्ट फोन देने की जिम्मेदारी से भाग रहा है। उन्होने कहा कि सरकार युवाओं को स्मार्ट फोन देने पर एक यां दूसरा बहाना लगाकर टालती आ रही थी, पर अब इसने यह कहकर युवाओं को डराने की कोशिश की है कि यह फोन कोरोना वायरस से प्रभावित हो सकते हैं तथा स्कीम बंद कर दी है।

राज्यपाल के भाषण पर बहस के दौरान मुख्यमंत्री के जवाब के बारे बोलते हुए अकाली नेताओं ने कहा कि कैप्टन अमंरिंदर ने अपनी सरकार की तथाकथित उपलब्धियां बढ़ा चढ़ाकर बताई हैं कि कांग्रेसी विधायकों को भी लगा कि यह गप्प थी तथा उन्होने बैंच थपथपाकर अपनी मंजूरी देना भी आवश्यक नही समझा। उन्होने कहा कि सच्चाई यह है कि मुख्यमंत्री उन चीजों के बारे में बातें कर रहा था, जो सिर्फ कागजों पर ही हैं। जिस तरह बड्डी तथा डैप्पो योजनाओं ने स्पष्ट कर दिया कि कैप्टन अमरिंदर एक सुस्त मुख्यमंत्री है न कि आदर्श मुख्यमंत्री, जैसेकि वह पंजाब के लोगों से नही बल्कि दिल्ली से एक पुरस्कार लेकर स्वयं को पेश करना चाहता था।

अकाली दल ने यह कहते हुए छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू करने में की जा रही देरी की निंदा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने एक और वर्ष के लिए कमिशन की बैठक मुल्तवी करने की घोषणा कर दी है। इसने छठे वेतन आयोग को लागू करने में तीन साल की देरी हो जाएगी। उन्होने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को वादे के अनुसार न तो डीए बकाया दिए जा रहे हैं तथा न ही उन्हे नियमित किया जा रहा है।

सरदार ढ़िल्लों तथा सरदार मजीठिया ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पिछले तीन सालों के दौरान राज्य में 50 हजार करोड़ रूपए के निवेश की बात हवा में उछाली है। उन्होने कहा कि यदि राज्य एक में एक भी निवेश होता तो मुख्यमंत्री ने उस प्रोजेक्ट का उद्घाटन कर देना था। उन्होने कहा कि हम मुख्यमंत्री को ऐसे एक भी प्रोजेक्ट का उद्घाटन करते हुए नही देखा, जो कांग्रेस सरकार की कोशिशों के परिणामस्वरूप सिरे चढ़ा हो।

अकाली नेताओं ने कहा कि 6 हजार स्कूलों में अंग्रेजी शुरू करने का फैसला मां-बोली पंजाबी के हितो के खिलाफ है। उन्होने कहा कि इससे पंजाबी किनारे लग जाएगी, इसीलिए इस फैसले को रोक लेना चाहिए। उन्होने कहा कि कितने दुख की बात है कि पिछले एक साल से बकाया पड़े फसली मुआवजा तथा 700 से 800 करोड़ रूपए के गन्ना उत्पादकों के बकाया को जारी करने के लिए कोई रूप रेखा तैयार नही की गई है।

Written By
The Punjab Wire