क्यों मोदी जी से ख़फा है, नाराज है गुरदासपुर के लोग। क्या कहना है लोगों का?

देखता था कि गुरदासपुर की जनता अपने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी से बेहद खफा  हैं। उनका कहना है कि गुरदासपुर मोदी जी के सवा सौ करोड़ देश वासियों में शुमार नही है। कुछ काम था तो बब्बेहाली नहर की तरफ चला गया ।लोगों के विचार जानना चाहता था।

बब्बेहाली नहर पर बने पुल पर पकौडे खा रहे कुछ लोगो से मोदी जी के खिलाफ विरोध का कारण पूछा।एक बुजुर्ग ने उदाहरण देते हुए कहा कि पुराने रिवाज थे कि जब भी कोई किसी से काफी समय के बाद मिलने जाता अपनी समर्था के अनुसार कुछ लेकर जाता। बेशक  चीज मायने नहीं रखती परन्तु प्यार और स्नेह मायने रखते। गरीब सुदामा भी राजा श्री कृष्ण के लिए भुने हुए चावल लेकर गए। तथा राजा श्रीकृष्ण ने उन्हे वापसी में भारी तोहफे भेंट किए।


ऐसे ही जब हम किसी को मिलने जाते हैं तो बच्चों के लिए फल लेकर जाते हैं और आते हुए कुछ पैसे देकर आते हैं ताकि बच्चों को अच्छा लगे। क्योंकि बच्चों में भी बेहद उत्सुकता होती है कि कोई मेहमान हमारे घर आ रहा है।ऐसे ही बच्चों वाली उत्सुकता गुरदासपुर के लोगो ने अपने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर मोदी जी के आगमन पर दिखाई दी। लोगो का कहना था कि हालाकि पहली बार वह जब कुछ नहीं देकर गए तो लोगों ने सोचा हो सकता है कि सांसद उनकी पार्टी से संबंधित नही है। सो उन्होने सब्र का प्याला पी लिया। 


परन्तु दूसरी बार फिर देश के प्रधानमंत्री गुरदासपुर आए और फिर गुरदासपुर के विकास को अनदेखा कर उस चालाक, बेकद्र मेहमान की भांति खा पी कर हाथ झाडते हुए चले गए जैसे गुरदासपुर के लोग उनके सवा सौ करोड़ देशवासियो में शुमार ही न हो। लोगों की भावनाओं की कद्र तक नहीं की।


एक सरदार जी ने पंजाबी में मिसाल देते हुए कहा कि हमारे घर भी कुछ बेशर्म मेहमान आते हैं जो चाय पानी भी पीते है तथा बाद में अपना पिछवाड़े को झाडते हुए निकल जाते हैं। बच्चे रोते रहते हैं जिन्हे हम बेहद मुश्किल से चुप करवाते है। यहीं  प्रधानमंत्री हमारे साथ कर के गए। जबकि उन्हें सोचना चाहिए था। 


एक महिला जो अपने पति के साथ साइकल पर नवापिंड सरदारा की तरफ जा रही थी को पूछा तो वह भडकती हुई अपने पति पर टूट पडी। बोली ऐस नाल इंज ही होना चाहिए भाजी पिंड च सनी देओल आया सी वड्डा फैन बनिया फिरदा सी। हुन कह उहनू कोई कम दवाए। बेडा गर्क कर गया।उसने प्रधानमंत्री जी के बारे में भी ऐसे भड़ास निकाली लिखना सही नही होगा। खैर मैने वहां चाय पी पकौडे खाए और वापस आ गया। पता चल गया कि लोगों के दिल में क्या है। 


मनन सैनी

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