कोरोना मृतकों की संख्या को लेकर डीसी इश्फाक गंभीर, जिला गुरदासपुर के कई डाक्टरों तथा कैमिस्टों पर गिरी गाज, कोविड़ के लक्ष्णों वाले मरीजों की जानकारी न देने पर मैजिस्ट्रियल जांच के दिए आदेश

कोविड़ के लक्ष्ण वाले मरीजों को आम मरीजों की तरह डील कर करते रहे उपचार, सही इलाज में देरी के चलते मरीजों की हुई मौत

डीसी इश्फाक की दू टूक जांच में दोषी पाए जाने पर किसी भी सख्त कारवाई से नहीं हटेगें पीछे

गुरदासपुर में मरने वालों का आंकडा हुआ 400, अन्य 141 मरीज पाए गए संक्रमित

एसएसपी डाॅ नानक सिंह का कहना कंटोनमेंट जोन में लगाई जाएगी बैरिगेटिंग तथा पुलिस, नहीं चाहते बढ़े कोरोना संक्रमण

गुरदासपुर, 14 अप्रैल (मनन सैनी)। जिला गुरदासपुर के तीन डाक्टरों एवं एक कैमिस्ट पर बुधवार को कोरोना वायरस के लक्ष्ण वाले मरीजों की जानकारी स्वस्थ्य विभाग के साथ सांझा न करने के चलते गाज गिरी और उनके खिलाफ गुरदासपुर के डिप्टी कमिश्ननर मोहम्मद इश्फाक की ओर से मैजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए गए। उक्त डाक्टर एवं कैमिस्ट दीनानगर तथा गुरदासपुर से संबंधित है।

गौर रहे कि पिछले दिनों जिला गुरदासपुर में कोविड़-19 के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए जिला मैजिस्ट्रेट की ओर से फरमान जारी किए गए थे कि कोई भी स्कैनिंग सैंटर, मेडिकल प्रेक्टिशनर, दवा विक्रेता, टैस्टिंग लैब आदि जिसके पास कोरोना वायरस के लक्ष्ण वाले मरीजों आता है उसकी जानकारी स्वस्थ्य विभाग के साथ सांझी की जाए। परन्तु देखा गया कि जिले में कई डाक्टर, स्कैनिंग सैंटर तथा कैमिस्ट इसे गंभीरता से नही ले रहे थे तथा जिले में मौत का आंकड़ा बढ़ रहा था। ​जिसके चलते इस कारवाई को अंजाम दिया गया।

इस संबंधी पुष्टी करते हुए डीसी गुरदासपुर मोहम्मद इश्फाक ने बताया कि कोविड़-19 से जिले में 400 मरीजों की मौत हो गई है। मरने वालों मरीजों की मौत की समीक्षा की गई तथा प्राथमिक जांच में पता चला कि वह अपने स्तर पर ही किसी आयुर्वेदिक डाक्टरों या कैमिस्टों से दवाएं ले कर खाते रहे तथा हालात ज्यादा खराब होने पर उन्हे अस्पताल में दाखिल होना पड़ा जहां उनकी मौत हो गई। परन्तु अगर स्वस्थ्य विभाग को पहले ही समय पर उनकी जानकारी मिल जाती तो सही समय पर सही इलाज से उनकी जान बचाई जा सकती थी।

DC Mohammad Ishfaq

डीसी ने बताया कि डाक्टरों, कैमिस्टों, लैब तथा स्कैनिंग सैंटरों का कोरोना रोकने में अहम योगदान है।​ जिले के कई डाक्टरों एवं कैमिस्टों ने संदिग्धों की लिस्ट विभाग को भेजी तो 90 मरीजों में से 20 मरीज संक्रमित पाए गए तथा उनका सही समय पर सही इलाज ​शुरु किया गया और उनकी जान बच गई। परन्तु जो डाक्टर या कैमिस्ट संदिग्ध का इलाज भी आम खांसी बुखार की तरह कर रहे है उनकी वजह से मरीज को इलाज में देरी हो जाती है और उन्हें नाजुक हालत में अस्पताल रैफर कर दिया गया जहां उसकी मौत हो गई।

डीसी इश्फाक की ओर से साफ तथा सख्त शब्दों में कहा गया कि जांच में दोषी पाए जाने वाले के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी कारवाई की जाएगी, जिसमें लाईसैंस रद्द किए जाएगें तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ लापरवाही बरतने के चलते मामला भी दर्ज किया जाएगा।

उन्होने बताया कि जिला गुरदासपुर में 1.95 लाख लोगों को वैक्सीन लग चुकी है जो नैश्ननल एवरेज से ज्यादा है तथा पंजाब भर में जिला दूसरे स्थान पर है। उन्होने कहा कि वह धार्मिक संगठनों, राजनितिक सगठनों, किसान संगठनों से भी अपील करते है कि वह नियमों का पालन करें। वहीं उनकी ओर से कोविड़ पेशेंट मैनेजमैंट कमेटी बनाई जिसमें जरुरतमंद मरीजों को सरकारी स्टोर से मुफ्त उपलब्ध करवाएगें। इसी के साथ गरीबों को माली सहायता भी देगें।

डीसी ने दोबारा सभी​ निजी लैब, डाक्टर, स्कैनिंग सैंटरों, आर एम पी ,कैमिस्टों से अपील की कि वह ​बेशक इलाज करें, दवां दें, सभी को सर्विस दें परन्तु संदिग्ध मरीज की जानकारी दिन में एक बार डीएमसी डॉ रोमी को भेजें ताकि कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों ट्रेक कर महामारी को फैलने से रोका जा सके तथा इसी के साथ साथ मरीज की जान बचाई जा सकें।

एसएसपी डाॅ नानक सिंह

वहीं दूसरी तरफ पाया गया कि कंटेनमैंट जोन बनाए जाने के बावजुद न तो वहां किसी प्रकार पुलिस का पहरा होता है और न ही बैरीगेटिंग की गई है। हालाकिं इस संबंधी गुरदासपुर के एसएसडी डाॅ नानक सिंह ने बताया कि कंटेनमेंट जोन हर रोज बदलते रहते है। जहां पूरी तरह से पुलिस की पहरा लगाया जाता है। फिर भी जिन कुछ जगहों पर पुलिस का पहरा या बैरिगेटिंग नही है वहां फोर्स लगाई जाएगी। उन्होने कहा कि पुलिस कदापि नही चाहती कि कोरोना वायरस संक्रमण बढ़े तथा लोगों की जान जाए।

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