दीनानगर में मूंगफली की फैक्ट्री में अचानक लगी आग, लाखों का हुआ नुक्सान

नगर में पानी की व्यवस्था न होने के चलते फायर ब्रिगेड को आग बुझाने में पेश आई दिक्कत

गुरदासपुर, 21 नवंबर । सिनेमा हॉल दीनानगर के पास पन्नालाल नरेश कुमार एंड कंपनी की मूंगफली की फैक्ट्री में सुबह अचानक आग लग गई। फैक्ट्री से धुआं निकलता देख लोगों ने फैक्ट्री मालिक को सूचित किया और फायर बिग्रेड को सूचना दी। जिसके बाद एक घंटे बाद पहुंची फायर बिग्रेड ने आग पर काबू काफी मशक्कत के बाद काबू पाया। हालांकि साढ़े दस बजे के करीब फिर से आग भडक़ उठी। जिसको बुझा दिया गया। इस दौरान नगर में पानी की व्यवस्था ना होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ी को भारी मुश्किल का सामना करना पड़ा। किसी दूसरी जगह से पानी की व्यवस्था कर आग पर काबू पाया गया  प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया की आग इतनी भयानक थी कि अगर समय रहते इस पर काबू न पाया जाता तो आसपास की फैक्ट्रियां भी जलकर राख हो जाती। 

इस संबंधी जानकारी देते हुए फैक्ट्री के मालिक वरुण महाजन ने बताया की फैक्ट्री में आग लगने के बारे में उन्हें सुबह छह बजे के करीब पता चला। जब वह फैक्ट्री में पहुंचे तो आग धू धू कर जल रही थी।इसकी जानकारी तुरंत फायर ब्रिगेड ऑफिस को दी। फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया । उन्होंने बताया की फायर ब्रिगेड की गाड़ी से पानी खत्म होने पर दीनानगर में पानी की व्यवस्था ना होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ी को पानी का इंतजाम शहर से बाहर जाकर करना पड़ा।महाजन ने बताया कि आग कैसे लगी अभी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। फैक्ट्री में भारी मात्रा में कच्ची और पक्की मूंगफली की बोरिया पड़ी हुई थी। अभी असल नुकसान बताना अभी मुश्किल है।फिर वी करीब दस लाख से ऊपर के नुकसान होने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि सुबह फायर ब्रिगेड की गाडिय़ां आग बुझा कर वहां से चल गई थी। उन्होंने बताया कि मूंगफली में आयल होने के कारण आग धीरे-धीरे सुलगती रहने के कारण सुबह करीब साढ़े दस बजे फिर अचानक आग लगने लगी।फिर फायर ब्रिगेड गुरदासपुर को फोन किया और उनकी गाड़ी ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया।

गौरतलब है कि दीनानगर में फायर ब्रिगेड ना होने के कारण नगर व आसपास के क्षेत्र में आग से होने वाले हादसे और उसके बचाव के लिए गुरदासपुर और पठानकोट फायर ब्रिगेड पर निर्भर करना पड़ता है। दीनानगर में फायर ब्रिगेड होता तो आज हुई आग की घटना में हुए नुकसान से बचा जा सकता था या उसे कम किया जा सकता था।

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