अकाली-भाजपा द्वारा राज्यपाल से अलग हरियाणा कमेटी का समर्थन करने वाला शपथ पत्र तुरंत वापिस लेने के लिए पंजाब सरकार को निर्देश देने का अनुरोध

राज्यपाल से अनुरोध राज्य सरकार को कांगड़ तथा किक्की ढ़िल्लों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के अलावा उन्हे कैबिनेट मंत्री तथा मुख्यमंत्री के सलाहकार के पद से हटाने का निर्देश दें

चंडीगढ़/14फरवरीः शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर गांधी परिवार के सिख विरोधी एजेंडे को पूरा करने के लिए हरियाणा के लिए अलग गुरुद्वारा कमेटी का समर्थन करके सिख गुरुद्वारों की सेवा संभाल करने वाली सर्वोच्च संस्था शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) समेत सिख संस्थाओं को कमजोर करने की साजिश करने का दोष लगाया है। इसके साथ ही उन्होने राज्य सरकार द्वारा इस संबधी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए ताजा शपथ पत्र को तत्काल वापिस लिए जाने की मांग की है।

यहां पंजाब राजभवन के बाहर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि हरियाणा में हुड्डा सरकार के समय राज्य में एक अलग कमेटी बनाने का प्रस्ताव पेश करके सिख मामलों में दखल देने की कोशिश की गई थी। उन्होने कहा कि पर उस समय के प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने हमे आश्वासन दिलाया था कि ऐसी किसी कोशिश को कामयाब नही होने दिया जाएगा, क्योंकि वह इस मामले की संवेदनशीलता को समझते थे, जिसका कारण यह था कि सिख गुरुद्वारों की सेवा संभाल के लिए सिख संस्था एसजीपीसी की स्थापना के लिए उनके पूर्वजों ने भी काफी कुर्बानियां दी थी । उन्होने बताया कि परंतु कुछ समय बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने इस मामले में अपनी बेबसी जताई थी, क्योंकि सोनिया गांधी ने हरियाणा के लिए अलग कमेटी के गठन का फैसला कर लिया था।

इससे पहले शिरोमणी अकाली दल तथा भारतीय जनता पार्टी का एक सांझा प्रतिनिधिमंडल सुखबीर सिंह बादल तथा मदन मोहन मित्तल के नेतृत्व में पंजाब के राज्यपाल श्री वीपी सिंह बदनौर से मिला तथा उनसे अनुरोध किया कि वह राज्य सरकार को इस द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दिया शपथ पत्र तत्काल वापिस लेने का निर्देश दें, जोे यह कहकर हरियाणा सरकार का समर्थन करता है कि हरियाणा सरकार के पास सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 में संशोधन करके कानून बनाने की शक्ति है। इस प्रतिनिधिमंडल ने कांग्रेस सरकार द्वारा सिख कौम तथा सिख गुरुद्वारों की सेवा संभाल करने वाली संस्था के हितों के साथ खिलवाड़ करने के लिए रची साजिश का पर्दाफाश करने के लिए एक उच्च स्तरीय न्यायिक जांच करवाने की मांग की।

सांझे प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के राजपाल से यह भी अनुरोध किया कि वह पंजाब सरकार को निर्देश दें कि वह बहबलकलां के मुख्य गवाह पूर्व सरपंच सुरजीत सिंह को मौत के मुंह में धकेलने के लिए गुरप्रीत सिंह कांगड़, कुशलदीप सिंह ढ़िल्लों तथा मनजिंदर सिंह ढ़िल्लों के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज करें। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने कांगड़ तथा ढ़िल्लों क्रमशः मंत्रीमंडल तथा मुख्यमंत्री के सलाहकार के पद से हटाए जाने की भी मांग की।

सुरजीत सिंह की मृत्यु के बारे बोलते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि बहबलकलां फायरिंग घटना के मुख्य गवाह को कांग्रेसी नेताओं के इशारे पर मानसिक तौर पर परेशान तथा अपमानित किया गया, जोकि दोषी पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए उसे इस मामले में गवाही देने से रोकना चाहते थे।

जिसके लिए उन्होने हर हथकंडा अपनाया, जिसमें बिजली विभाग के अधिकारियों के माध्यम से पीड़ित को भारी जुर्माना करवाना तथा महिलाओं समेत उसके पारिवारिक सदस्यों को अपमानित करना शामिल था। उन्होने बताया कि यह सनसनीखेज खुलासे पीड़ित की विधवा तथा बेटे द्वारा किए गए हैं।

अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि कितनी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि सुरजीत सिंह की विधवा द्वारा अपने पति की मौत पिछली साजिशों का पर्दाफाश करने के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात करने समेत की सभी कोशिशों के बावजूद राज्य सरकार ने इस घटना की उच्च स्तरीय जांच करवानी शुरू नही की है। उन्होने कहा कि इस केस की संवेदनशीलता तथा गंभीरता को ध्यान में रखते हुए यह केस स्वतंत्र जांच के लिए सीबीआई को सौपं दिया जाना चाहिए। अकाली-भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने सुरजीत सिंह के परिवार तथा बेअदबी केसों के सभी गवाहों के लिए मुकम्मल सुरक्षा का इंतजाम करने की भी मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने उन अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने की मांग की, जिन्होने सुरजीत सिंह द्वारा दिए आवेदन पर समय रहते कार्रवाई नही की थी।

हरियाणा के लिए अलग कमेटी पर राज्य सरकार के स्टैंड को पंजाब तथा सिखों के हितों के साथ बड़ा विश्वासघात करार देते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि सोनिया तथा राहुल गांधी के इशारे पर सुप्रीम कोर्ट में ताजा शपथ पत्र दाखिल करके कैप्टन ने इस संवेदनशली मुद्दे पर राज्य का स्टैंड बदल दिया है। उन्होने कहा कि यह गांधी परिवार द्वारा हमारे पवित्र स्थान श्री हरिमंदिर साहिब पर 1984 में तोपों तथा टैंकों से किए हमले के बाद सिखों पर किए दूसरे हमले के समान है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता श्री मदन मोहन मित्तल ने कहा कि इस बेहद महत्वपूर्ण केस के मुख्य गवाह को सुरक्षा प्रदान न करना वर्तमान पंजाब सरकार की बुरी नीयत को साबित करता है। उन्होने कहा कि गवाह की सुरक्षा देने की बजाय कांग्रेसी मंत्रियों ने दोषियों को बचाने के लिए गवाह को उल्टा परेशान तथा अपमानित किया। यह बात स्वीकार योग्य नही है।

प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों में अकाली दल से एसजीपीसी के अध्यक्ष सरदार गोबिंद सिंह लौंगोवाल, सरदार चरनजीत सिंह अटवाल, सरदार महेशइंदर सिंह ग्रेवाल, सरदार जनमेजा सिंह सेखों, डॉ. दलजीत सिंह चीमा, सरदार सिकंदर सिंह मलूका, सरदार सुरजीत सिंह रखड़ा,श्री एनके शर्मा सरदार चरनजीत सिंह बराड़, सरदार परमबंस सिंह बंटी के अलावा भाजपा से श्री राकेश राठौर, श्री प्रवीण बंसल, सरदार दयाल सिंह सोढ़ी तथा श्री तरूण चुघ आदि भी शामिल थे।

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