अकाली दल द्वारा राज्यपाल से 4100 करोड़ रूपए के बिजली घोटालों की सीबीआई जांच के लिए कांग्रेस सरकार को निर्देश देने का अनुरोध

सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली प्रतिनिधिमंडल ने घोटाले वाली फाईलों के साथ जुड़े सभी मंत्रियों तथा अधिकारियों को निष्कासित करने की मांग की

कहा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी का बोझ सरकारी खजाने पर डालना चाहिए,उपभोक्ताओं पर नही

चंडीगढ़/15जनवरीः शिरोमणी अकाली दल ने आज पंजाब के राज्यपाल श्री वी.पी. सिंह बदनौर से आग्रह किया है कि वह राज्य में हाल ही में हुए 4100 करोड़ रूपए के बिजली घोटालों के संबध में मंत्रियों, कांग्रेसी नेताओं तथा अधिकारियों के गठजोड़ की सीबीआई जांच की सिफारिश करने के लिए कांग्रेस सरकार को निर्देश दें।

पार्टी अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में अकाली दल के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से यह भी अनुरोध किया कि वह राज्य सरकार को घोटाले वाली फाईलों के साथ जुड़े सभी मंत्रियों तथा अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त करने का निर्देश दें, जिनके कारण राज्य का 4100 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है। किसी भी किस्म की छेड़छाड़ से बचाने के लिए इन सभी फाईलों को तत्काल सील करने की मांग करते हुए अकाली प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वह सरकार को इन घोटालों के कारण बढ़ाई बिजली दरों का भुगतान सरकारी खजाने से करने के लिए कहें तथा यह बोझ आम लोगों पर न डाला जाए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जांच के बाद यह अतिरिक्त बोझ उन व्यक्तियों से वसूला जाना चाहिए, जो दोषी पाए जाते हैं।

राज्यपाल को जानकारी देते हुए अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेसी नेताओं,मंत्रियों, उच्च अधिकारियों तथा प्राईवेट सैक्टर की कंपनियों द्वारा आपसी मिलीभगत से बड़े पैमाने पर किए भ्रष्टाचार के कारण राज्य को 4100 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ है। इस घोटाले की विस्तृत जानकारी देते हुए सरदार बादल ने कहा कि कुछ व्यक्तियों ने प्राईवेट कंपनियों से बड़ी रकम लेने के बाद जानबूझ कर अदालतों तथा ट्रिब्यूनल के आगे सरकारी पक्ष को कमजोर करके महत्वपूर्ण केसों में सरकार को हराया है। उन्होने कहा कि इस मामले में प्राईवेट कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए अदालतों से महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाया तथा तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया है।

अन्य जानकारी देते हुए प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों सरदार बलविंदर सिंह भूंदड़ तथा प्रोफेसर प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने कहा कि कोयला धुलाई के जिस केस में, सरकार को तत्काल 1400 करोड़ रूपए तथा 1100 करोड़ रूपए बाद में देने के लिए कहा गया है, पिछली अकाली-भाजपा सरकार ने राजपुरा थर्मल प्लांट की मैनेजमेंट को स्पष्ट कर दिया था कि कोयले की धुलाई सफल बोलीकार को ही करवानी पड़ेगी। नेताओं ने कहा कि समझौते की शर्तें शुरू होते ही प्राईवेट कंपनियों से कोयले की धुलाई का खर्चा मांगना शुरू कर दिया था, जिसे रद्द कर दिया था। उन्होने कहा कि अकाली-भाजपा सरकार के समय प्राईवेट कंपनियों के इन दावों को पीएसईआरसी द्वारा तथा केंद्रीय अथाॅरिटी एपीटीईएल द्वारा भी रद्द कर दिया गया था।

उन्होने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभालने के बाद बेईमानी करते हुए सुप्रीम कोर्ट में यह झूठा बयान दे दिया कि प्रोजेक्ट वाली जगह पर कोयले की कैलोरिफिक वेल्यू मापने की कोई पद्धति नही है। उन्होने कहा कि यह स्पष्ट झूठ था। 2017 के नाभा पावरज लिमिटेड बनाम पीएसपीसीएल केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैरा 68 में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि कोयले की कैलोरीफिक वेल्यू प्रोजेक्ट वाली जगह पर निकाली जानी चाहिए थी। इसमें यह भी कहा गया है कि पीएसपीसीपए द्वारा किए अनुरोध कि प्रोजेक्ट वाली जगह पर कैलोरिफिक वेल्यू मापने की कोई पद्धति नही थी, अलग अलग वित्तीय सालों की सैंपल रिर्पोटों को सही नही ठहराती, जिनमें सांझी सैप्लिंग तथा टेस्टिंग का हवाला दिया गया था। अदालत ने इस इंकार के लिए पीएसपीसीएल को फटकार भी लगाई थी।

सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया तथा डाॅ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि एक कोयला कंपनी द्वारा लगाए दोषों पर पंचायती ट्रिब्यूनल के फैसले वाले केस में उच्च न्यायालय में एक सुनवाई के दौरान यह खुलासा हुआ था कि कोयला कंपनी को 1602 करोड़ रूपए का हर्जाना देने संबधी ट्रिब्यूनल के इस फैसले को कांग्रेस सरकार ने ढ़ाई साल तक चुनौती नही दी थी। उन्होने कहा कि ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती न देने के बावजूद सरकारी पक्ष ने ट्रिब्यूनल की कार्रवाई में भाग लेना जारी रखा। उन्होने कहा कि इससे साबित होता है कि कांग्रेस सरकार कोयला कंपनी से दोस्ताना मैच खेल रही थी।

यह टिप्पणी करते हुए कि सरकार द्वारा अंदरूनी तौर पर की ऐसी सौदेबाजियों के कारण ही इसे बिजली दरें बढ़ानी पड़ी हैं, अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस सरकार के पिछले तीन साल के कार्यकाल के दौरान उपभोक्ताओं पर 2200 करोड़ रूपए का अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है। सरदार बादल ने बाद में पत्रकारों को बताया कि यदि इस मामले में न्याय न मिला तो पार्टी उच्च न्यायालय जाएगी।

प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों में चरनजीत सिंह अटवाल, गुलजार सिंह रणीके, सुरजीत सिंह रखड़ा तथा बलदेव सिंह मान भी शामिल थे।

error: Content is protected !!