कृषि अध्यादेशों के मुद्दे पर किसान यूनियनों में अपनी साख बचाने के खातिर शिरोमणि अकाली दल ने यू-टर्न लेने का ढकोसला रचा-कैप्टन अमरिन्दर सिंह

दोहरे मापदंड अपनाने के लिए सुखबीर बादल की कड़ी आलोचना

अकाली दल के प्रधान को किसानों के प्रति पार्टी की सोहृदयता सिद्ध करने के लिए केंद्र सरकार से अलग होने की चुनौती

चंडीगढ़, 13 सितम्बर: पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल के प्रधान द्वारा किसानों की आंखों धूल झोंकने के लिए कृषि अध्यादेशों पर अपने पहले स्टैंड से अचानक पलटने (यू-टर्न) के कदम को ढकोसला करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने सुखबीर बादल को इस मसले पर अपनी पार्टी की किसानों के प्रति संजीदगी सिद्ध करने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का साथ छोडऩे की चुनौती दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र में गठजोड़ सरकार का हिस्सेदार होने के नाते अध्यादेश लाने में अकाली दल भी शामिल है और यहाँ तक कि इन्होंने अध्यादेशों की बिना शर्त हिमायत भी की थी। मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर अकालियों द्वारा दोहरे मापदंड अपनाने के लिए सुखबीर बादल को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि जब भी केंद्र सरकार इन अध्यादेशों को संसद में पास करवाने के लिए पेश करेगी तो क्या अकाली नेता इनके $िखला$फ वोट डालने के लिए तैयार है?

मुुख्यमंत्री ने शिरोमणि अकाली दल की केंद्र सरकार की ऐसी अपील को बेहूदगी करार दिया, जिसने तीनों केंद्रीय कृषि अध्यादेशों संबंधी किसान जत्थेबंदियों के डर दूर होने तक इनको मंज़ूरी के लिए संसद में पेश न करने के लिए कहा गया था। मुख्यमंत्री ने सुखबीर के उस दावे को याद किया जब उन्होंने (कैप्टन अमरिन्दर सिंह) द्वारा इस मुद्दे पर जून में बुलाई गई सर्वदलीय मीटिंग में अकाली नेता ने कहा था कि केंद्र सरकार ने शिरोमणि अकाली दल को भरोसा दिया है कि न्युनतम समर्थन मूल्य के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे यह बात अब जग जाहिर हो गई है कि अकाली दल के प्रधान ने उस मौके पर किसानों को गुमराह करने के लिए जानबूझ कर झूठ बोला था। उन्होंने कहा कि सुखबीर के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए इस मुद्दे पर वह जो भी कह रहे हैं, उस पर भरोसा या विश्वास नहीं किया जा सकता। मुुख्यमंत्री ने राज्य से जुड़े अन्य बड़े मुद्दों में सी.ए.ए/एन.सी.आर पर अकाली दल के रूख की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अकालियों ने दोहरे मापदंडों को छोडऩे की बजाय इसको अपनी आदत बना लिया है।

उन्होंने कहा ‘‘जब अध्यादेश लाए जा रहे थे तो वह क्या कर रहे थे? उन्होंने ऐतराज़ क्यों नहीं किया? आखिरकार, वह इन अध्यादेशों के लिए जि़म्मेदार केंद्र सरकार का हिस्सा हैं?’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल की तरफ से केंद्र को ‘अश्यादेशों पर जल्दबाज़ी न करने’ की अपील करने सम्बन्धी अचानक लिए गए फैसले से पंजाब विधान सभा की मतदान, जिसमें तकरीबन 18 महीने रह गए हैं, को देखते हुए किसान यूनियनों/संगठनों की नज़र में अपना अक्स सुधारने की उनकी निराशा साफ झलकती है। किसानों के हितों को बुरी तरह दरकिनार करने के बाद अकाली अब नए पैंतरों के साथ अपने बुरे कामों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसानों समेत पंजाब के लोग यह अच्छी तरह से जानते हैं कि सुखबीर पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं। कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने सुखबीर के बयान कि इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में शिरोमणि अकाली दल समान विचार वाली पार्टियों के साथ बातचीत करेगा, को झूठा कहकर पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने सवाल किया ‘‘कांग्रेस समेत समान सोच वाली पार्टियों ने सर्वदलीय पार्टी मीटिंग के दौरान जून में अध्यादेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया था। वह तब क्या कर रहे थे? तब उन्होंने हमारे स्टैंड का समर्थन क्यों नहीं किया?’’

मुख्यमंत्री ने किसानों की चिंता सम्बन्धी विचार-विमर्श के लिए केंद्र सरकार को मिलने के लिए सुखबीर के नेतृत्व अधीन एक प्रतिनिधिमंडल भेजने संबंधी अकाली दल के फैसले को हास्यप्रद करार दिया। इस सम्बन्ध में अकालियों के इतनी देर बाद जागने पर सवाल करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र से संपर्क करने का फैसला सर्वदलीय पार्टी ने जून में ही लिया था। सुखबीर को अपनी घटिया चालों के साथ पंजाब के लोगों को मुर्ख बनाना बंद करने की बात करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि अकाली दल के किसानों के हितों की रक्षा के लिए कोई भी बलिदान करने के लिए तैयार रहने के दावे पूरी तरह से झूठे पाए गए हैं। उन्होंने सुखबीर को पूछा ‘‘आपकी पत्नी केंद्रीय मंत्री है। क्या उन्होंने एक बार भी मंत्रीमंडल में किसानों के हक में आवाज़ उठाई?’’ उन्होंने कहा कि इसके उलट केंद्रीय मंत्रीमंडल में अकालियों की मौजुदगी ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि कांग्रेस के नेतृत्व वाले पंजाब राज्य के साथ केंद्र सरकार द्वारा सौतेली माँ वाला सलूक जारी रहेगा।

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