कैप्टन सरकार को आम लोगों की अपेक्षा शराब माफिया की ज़्यादा फिक्र-हरपाल सिंह चीमा

‘आप’ ने शराब के ठेके खोलने के लिए इजाजत मांगने का किया विरोध

बेहतर होता जरूरतमंद परिवारों, किसानों-मजदूरों और इंडस्ट्री के लिए विशेष पैकेज मांगते मुख्यमंत्री 


चंडीगड़, 22 अप्रैल। आदमी पार्टी (आप) पंजाब के सीनियर व विपक्ष के नेता हरपाल सिंह चीमा ने लॉकडाउन (कफ्र्यू) के दौरान राज्य में शराब के ठेके खोलने सम्बन्धित लाए प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया है। चीमा के अनुसार ऐसे हलातों में ठेके खोलने से सिर्फ शराब माफिया को मौज लगेगी, जबकि शराब के कारण आम लोगों के घरों में क्लेश बढ़ेंगे।

‘आप’ हैडक्वाटर से जारी बयान के द्वारा हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि ऐसे माहौल में ठेकों का खुलना सामाजिक और नैतिक स्तर पर पूरी तरह गलत होगा। इस लिए कैप्टन सरकार की ओर से केंद्र सरकार से ठेके खोलने सम्बन्धित मांगी इजाजत पंजाब सरकार को वापस लेनी चाहिए, यदि पंजाब सरकार ऐसा नहीं करती तो केंद्र सरकार पंजाब में शराब के ठेके खोलने की कदाचित इजाजत न दे।

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि बेशक पंजाब सरकार सरकारी मालीया (रैवीन्यू) का हवाला दे कर मंजूरी मांग रही है, परंतु वास्तव में कैप्टन सरकार को अपने चहेतों की तरफ से चलाए जाते शराब माफिया की फिक्र सता रही है। चीमा ने कहा कि हमें यह कहने में रत्ती भर भी गुरेज नहीं है कि कैप्टन अमरिन्दर सिंह के खासमखास शराब फैक्टरियों के मालिक हैं। चीमा ने कहा कि सरकार के ऐसे फैसले साबित करते हैं कि सरकार को गरीबों, जरूरतमंदों को राशन, मंडियों में परेशान हो रहे किसान-मजदूर-आड़तीए व कोरोना-वायरस से सीधी लड़ाई लड़ रहे डाक्टरों, नर्सों, आशा वर्करों, आंगणवाड़ी वर्करों, एंबुलेंस चालकों, पैरा मैडीकल स्टाफ और दिन रात ड्यूटी कर रहे पुलिस प्रशासन और बिजली विभाग के स्टाफ की बजाए शराब माफीया की ज्यादा फिक्र है। 

चीमा ने कहा कि शराब माफिया पहले भी सरकारी खजाने पर भारी थी, यदि लॉकडाउन के दौरान ठेके खुलने की इजाजत मिल जाती है तो भी वित्तीय फायदा सरकार का नहीं शराब माफिया का ही होगा। 
           

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